एक शिक्षक का रूप – एक सच्चा स्वरूप,
हर व्यक्ति का आधार, जीवन का स्तंभ, और मृत्यु का शंख।
कभी आँसुओं की बाढ़, कभी गर्व का मंज़र,
हर नायाब खेल का स्तंभ है।
वक्त है – इसे रेत का नाम।
गिरी से रौड़ा या कंकड़ से धराधर,
हर ओर इसका वर्चस्व है।
जीवन का पतन या उत्थान,
पल-पल गिरता, झर-झर बहता,
हर रंग जीवन के आलिंगन करता।
महारथी सा अद्भुत है, सबको नाचना चाहता है।
समय है – इसे सम्राट का नाम।
Written by: Sneha Gupta