लोग पता नहीं मुझें क्या समझते हैं
शायद अब खुदा समझते हैं
मेरी भी हद हो गई है अब सहन की
जिम्मेदारीया निभाने की और बस चुप रहने की
क्यों खमोश रहकर अब मैं उनकी हर बात मान लूं
क्यों ना इस बार खुद को पहले रख लूं
और थोड़ा सा आराम मांग लूं
हां भोले तुझपर तो हैं मुझें खुद से ज्यादा विश्वास
पर क्या करूं सब्र नहीं हैं तेरे जितना मेरे पास
तुम हो तो सांस मेरी अब भी चलती हैं
और क्या हैं ना तुम से ही मेरी हर सुबह खास बनती हैं
तुम्हारा ही नाम में सोते समय भी लेती हूं
मेरी मां कहती हैं मैं भोले तेरे नाम की दीवानी हूं
तुम हो तो सब सही सा लगता हैं
और इन बीते दिन में तुमने जो किया
उसके बाद तो सब अब पहले से और भी आसान
लगता हैं।
मैं तुझमें अपना सारा जहां देखती हूँ
तुझको पहले और खुद को तेरे बाद देखती हूँ
यकीन मान भोले बस कुछ और पल की
घड़ी बाकी हैं
और फिर तो तेरे नाम मैंने अपनी लिखनी सारी जिंदगानी हैं।
Priya kashyap