ऐ जुगनू
कविता
उस अंधेरी रात
जब मैं छत पर अकेली बैठी थी,
एक जुगनू आया और मेरे पैरों पर बैठ गया
तब मैंने कैसे देखे हुए उससे कहा
ऐ जुगनू, मेरे पास आक
मेरी कंधों प बैठ
मेरे पैरों को चूमना छोड़कर
आ मेरी हथेली पर बैठ
ऐ जुगनू मेरे पास आके मेरे कंधों पे बैठ
मेरे पैरों को चूमना छोड़कर
आके मेरे हथेली पर बैठ
और मेरे हाथों की लकीरों को रोशनी से भर दे
तेरी रोशनी काफी है
मेरी किस्मत को जगमगाने के लिए
ऐ जुगनू मेरे पास आ
और आ को मेरी लेहराते हुए बालों मैं लिपट जा
इन काले बाल में
टिमटिमाते तारे की तरह चमक
आकाश बन जाएंगे
तेरे होने से जिंदगी रोशन हो जाएंगे
और तेरी रोशनी काफी है
मेरी जिंदगी भर को रोशन करने के लिए
ऐ जुगनु मेरे पैरों को चूमना छोड़कर
आ मेरी हथेली पर बैठा