Hindi Quote in Motivational by Nitya Oswal

Motivational quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

भगवान महावीर स्वामी की वाणी

“अहिंसा परमो धर्मः।
सव्वे जीवा वि इच्छंति, जीविउं न मरिज्जिउं।।”

(अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। महावीर स्वामी कहते हैं – जैसे तुम्हें अपना जीवन प्यारा है, मरना कोई नहीं चाहता, वैसे ही इस संसार का हर जीव जीना चाहता है, मरना कोई नहीं चाहता। इसलिए किसी भी जीव को कष्ट मत दो।)

गहरे अर्थ की व्याख्या
इंसान सोचता है कि अहिंसा का मतलब होता है सिर्फ किसी को मारना नहीं है। पर महावीर की अहिंसा बहुत गहरी है। वो कहते हैं कि हिंसा 3 तरह की होती है – मन से, वचन से, और कर्म से। किसी के बारे में बुरा सोचना भी हिंसा है। किसी को गाली देना, ताना मारना, दिल दुखाना भी हिंसा है। और मारना-पीटना तो है ही। असली धर्म मंदिर जाना या माला फेरना नहीं है, असली धर्म है हर जीव के प्रति दया रखना। चींटी से लेकर हाथी तक, दुश्मन से लेकर दोस्त तक – सबकी आत्मा एक जैसी है। जब तक तेरे मन में किसी के लिए भी नफरत है, तब तक तू धार्मिक हो ही नहीं सकता। महावीर कहते हैं – खुद को जीतो, दुनिया अपने आप जीत जाओगे।

जीवन प्रसंग : चंडकौशिक नाग का
महावीर स्वामी जब घोर तप कर रहे थे, तब एक जंगल से गुजर रहे थे। वहां चंडकौशिक नाम का एक भयानक जहरीला नाग रहता था। वो इतना क्रोधी था कि उसकी फुफकार से ही पक्षी पेड़ से गिरकर मर जाते थे, जिस रास्ते से गुजरता वहां की घास जल जाती थी। पूरा इलाका वीरान हो गया था।
लोगों ने महावीर को रोका – “भगवन, उधर मत जाइए, वो नाग आपको डस लेगा।”

महावीर मुस्कुराए और उसी रास्ते पर चल दिए। चंडकौशिक ने देखा एक इंसान उसकी तरफ आ रहा है। वो आग-बबूला हो गया। फुफकार मारकर महावीर की तरफ दौड़ा और उनके पैर के अंगूठे पर डस लिया। खून की जगह दूध निकलने लगा।

पर महावीर शांत खड़े रहे। न गुस्सा, न डर, न बदले की भावना। उन्होंने नाग की आंखों में करुणा से देखा और बोले – “समझो चंडकौशिक, समझो। बुझे-बुझे, चंडकौशिक बुझे।”

ये शब्द सुनते ही नाग का पूरा जन्म-जन्मांतर का हिसाब आंखों के सामने घूम गया। उसे याद आया कि वो पिछले जन्म में एक क्रोधी तपस्वी था जिसने अहंकार में कई जीव मारे थे। महावीर की करुणा और प्रेम ने उसके जहर को अमृत में बदल दिया। वो शांत होकर महावीर के चरणों में लोट गया।

फिर उसने खाना-पीना छोड़ दिया। चींटी भी मुंह में चली जाती तो निकाल देता – कहीं जीव-हत्या न हो जाए। कुछ दिन बाद शांत भाव से उसने प्राण त्याग दिए। शास्त्र कहते हैं वो मरकर स्वर्ग में देव बना।

प्रसंग से सिद्ध वाणी:
महावीर ने दिखा दिया कि अहिंसा का मतलब कायर बनना नहीं है। उन्होंने नाग से नफरत नहीं की, उसे दुश्मन नहीं माना। मन से भी हिंसा नहीं की। अगर वो चाहते तो तप के बल से उसे भस्म कर सकते थे, पर उन्होंने प्रेम से जीता। ये सिद्ध करता है कि “सव्वे जीवा वि इच्छंति जीविउं” — हर जीव जीना चाहता है। नाग भी सुधरना चाहता था, बस उसे करुणा का स्पर्श चाहिए था।

विरोधाभास का समाधान
लोग पूछते हैं – “महावीर कहते हैं किसी को मत मारो, फिर अर्जुन ने महाभारत में लाखों को मारा। क्या अर्जुन पापी हुआ?”

जवाब: “नहीं। अर्जुन को पाप नहीं लगा।”

“क्यों?”

1. अर्जुन की नीयत क्या थी?
अर्जुन लड़ना ही नहीं चाहता था। गांडीव रख दिया था। बोला “मैं अपने गुरु, भाई, दादा को कैसे मारूं?” उसके मन में नफरत नहीं थी, मोह था। भगवान कृष्ण ने गीता में समझाया “तू सिर्फ निमित्त है। ये पहले से मरे हुए हैं। तू कर्तव्य कर, फल की इच्छा मत कर।”

2. महावीर और अर्जुन “फर्क कहां है?”
• चंडकौशिक को महावीर ने नहीं मारा क्योंकि वो सुधर सकता था। करुणा से काम चल गया।
• दुर्योधन को अर्जुन ने मारा क्योंकि वो सुधरने वाला नहीं था। 13 साल वनवास, द्रौपदी का चीरहरण, सबके बाद भी अकड़ नहीं गई। अगर अर्जुन युद्ध न करता तो अधर्म जीत जाता, करोड़ों निर्दोष मरते।

3. महावीर का सिद्धांत यहां कैसे लागू हुआ?
महावीर ने द्वेष को पाप कहा, कर्तव्य को नहीं। अर्जुन के मन में दुर्योधन के लिए व्यक्तिगत नफरत नहीं थी। वो क्षत्रिय धर्म निभा रहा था – कमजोर की रक्षा, अधर्म का नाश।

गीता 2.47 : “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”“तेरा अधिकार सिर्फ कर्म पर है।”

अर्जुन ने मन से हिंसा नहीं की। उसने अनासक्त भाव से तीर चलाया। जैसे डॉक्टर ऑपरेशन करता है – दर्द देता है पर मरीज को बचाने के लिए। नीयत मारने की नहीं, धर्म बचाने की थी।

व्यावहारिक उदाहरण
1. पुलिस वाला अपराधी को गोली मारता है। क्या वो हत्यारा है? नहीं। अगर नीयत जनता को बचाने की है, तो वो धर्म कर रहा है। पर अगर वर्दी की आड़ में बदला ले रहा है, तो पाप है।
2. आप रास्ते से जा रहे है, कोई गुंडा लड़की छेड़ रहा है। आप उसे 2 थप्पड़ मारकर भगाते है। क्या आपने हिंसा की ? नहीं। आपने एक बड़ी हिंसा रोकी। ये अहिंसा है। पर अगर आप अहंकार में आकर उसे अधमरा कर दो, तो वो हिंसा बन गई।

महावीर + अर्जुन का संगम - मुख्य सीख

★ पाप कर्म में नहीं, कर्तव्य भाव में है। नफरत से चींटी मारो तो पाप, करुणा से युद्ध करो तो धर्म।
★ अहिंसा का मतलब कायरता नहीं। चंडकौशिक सुधर सकता था तो प्रेम से जीतो। दुर्योधन नहीं सुधर सकता तो धर्म के लिए लड़ो।
★ खुद से पूछो : मैं ये क्यों कर रहा हूं? जवाब में ‘मैं’ ‘मेरा’ ‘बदला’ है तो रुको। जवाब में ‘धर्म’ ‘कर्तव्य’ ‘रक्षा’ है तो कर दो।
★ महावीर का सार : मन को हिंसा से खाली कर दो। फिर चाहे नाग के सामने खड़े हो या कुरुक्षेत्र में – तुम अहिंसक ही रहोगे।

आज की पावन प्रार्थना
“हे महावीर, हे माधव, मुझे ऐसी बुद्धि दे कि मैं कब करुणा से जीतूं और कब धर्म के लिए लड़ूं, ये समझ सकूं। मेरे हर कर्म के पीछे द्वेष न हो, बस कर्तव्य हो। मेरे मन-वचन-कर्म से अहिंसा बहे, चाहे मैं मौन बैठा हूं या युद्ध लड़ रहा हूं। मिच्छामि दुक्कडम्।”

Hindi Motivational by Nitya Oswal : 112028401
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now