मौसम का हाल, गरीबों से पूछिए
मौसम का हाल, गरीबों से पूछिए
ठण्ड की मार, गर्मी की तपन
कूड़ा बीनते बच्चों से पूछिए
भूखी-प्यासी, बर्तन माँझ कर पालती बच्चों को
मेहंदी का रंग क्या होता है, उस माँ से पूछिए
कंटीली राहों पे चलकर, पहुंचे जब मंजिल पर
पैरों की चुभन क्या है, उनसे पूछिए
बस साँस रुकी है किसी को देखने के लिए
एक साँस की कीमत उस मरते हुए प्राणी से पूछिए
मौसम का हाल, गरीबों से पूछिए
खेलने की उम्र में धो रहे बर्तन
क्या होता है बचपन, उनसे पूछिए
जिगर बेचकर अपना की बेटी की शादी
तंगहाली का जीवन उनसे पूछिए
खून सस्ता है पानी से
दूध में पानी की मिलावट उनसे पूछिए
21वीं सदी का सच, हुई कितनी तरक्की
पहुँच गए चाँद पर, पर जड़े अपनी भूल गए
अमीरी की चकाचौंध में रिश्ते सारे छूट गए
बुजुर्गों का साया छूटा, संयुक्त परिवार टूट गए
हुई परम्पराएं छिन भिन्न
आधुनिकता यूं ओढ़ ली
हो गई ग्लोबल विलेज दुनिया
पर खुद को ही भूल गए
क्या है हकीकत, क्या है सपने
क्या है मंजिल, क्या है राहें
सपनों की कीमत जरा उनसे तो पूछिए
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली