🌸रात गुजार लूँ🌸
तेरी ज़ुल्फ़ों तले रात गुज़ार लूँ,
जिस्मों की हरारत सँभाल लूँ।
मुद्दतों बाद मिले हो, चाँदनी रात है,
मिल जाओ इस तरह की थकान उतार लूँ।
तेरे होंठों की ख़ामोशियों को पढ़ूँ,
तेरी साँसों में अपनी साँसें वार लूँ।
तेरी धड़कन से अपनी धड़कन मिला,
आज ख़ुद को तुझ पर निसार लूँ।
तेरी बाँहों में कुछ पल ठहर जाऊँ,
सारी दुनिया से ख़ुद को किनार लूँ।
आज की रात फिर लौटकर आए न आए,
आ तुझे अपनी यादों में शुमार लूँ।
✍️बेनी सागर