ज़िंदगी तस्वीर भी है और तक़दीर भी है, फ़र्क सिर्फ रंगों का है, मनचाहे रंगों से सजे तो तस्वीर, और अनचाहे रंगों से सजे तो तक़दीर।थोड़ा सा रफ़्तार पर ब्रेक लगाइए जनाब, ये ज़िंदगी है, कोई रेस की गाड़ी नहीं।धूप में तो सब साथ चलते हैं, असली परख तो छांव आने पर होती है।ज़िंदगी को समझने में वक़्त मत ज़ाया करो, जैसी भी है, बस खुलकर जीना सीख लो
- Pintu Raval