💌 दिल का notification: #08
शीर्षक: सपने vs दुनियां
वो सपने, जो कभी-कभी अपनों से भी ज़्यादा अपने लगते हैं।
फिर आती है हक़ीक़त... बनकर ज़िंदगी।
और सामने रख देती है रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियाँ, पैसों की दिक्कत और घर के खर्चे।
तेरे सपनों के खिलाफ होंगे कुछ गैर... और कुछ अपने भी।
पर अपने सपनों से मत पलट। रख बस थोड़ा-सा ही उससे फ़ासला...
माँग कर ज़िम्मेदारियों से थोड़ा-सा उधार, दे अपने सपनों को नई उड़ान।
क्योंकि...
सपनों को हक़ीक़त में बदलने का नाम ही... ज़िंदगी है। ❤️
धड़क ते रहिए ❣️
✍🏼 जिगर अशोक पंड्या