परंपराओं की संवाहक मातृशक्तियाँ
भारतीय परंपरा और संस्कारों की प्रतीकता,
जिसकी संवाहक बनती हमारी मातृशक्तियाँ।
यह हमारा आपका सौभाग्य है
कि हमारे अपने जीवन में हमसे ज्यादा
मातृशक्तियों का योगदान है।
जो सदियों से निभाती आ रही
रीति रिवाजों और परंपराओं को सजाती हैं,
संस्कारों को सँवारने के साथ
हम सबके लिए, परिवार, समाज के लिए
त्याग की पराकाष्ठा की हद तक।
तीज, त्योहार, व्रत, पूजा-पाठ आदि-आदि से
और हमें जोड़कर रखती हैं
अपनी संस्कृति, संस्कार, परंपराओं और प्रकृति से
और बचाती हैं हमें तमाम प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मुश्किलों से।
इसीलिए हम उन्हें लक्ष्मी स्वरूपा मानते हैं
उनको मान सम्मान देते और उन पर गर्व करते हैं,
उनके साथ अपने हर रिश्ते को मान देते हैं,
समय, रीति और परंपराओं के अनुसार
उनके चरणों में नत्मस्तक भी होते हैं।
सुधीर श्रीवास्तव