मैं लिखती हूं या खूबसूरतपंक्तियां
कविता
मैं लिखती हूं एक खूबसूरत पंक्तियां
पानी के ऊपर टेरती लास
फुली हुई सड़ती लाश
वह भी बला की खूबसूरत होगी क्या
कल परसों से पहले
उसकी भी सिंगार की दीदार कोई करता होगा क्या
कल परसों से पहले
क्या है कोई इसका अपना
जो उसे प्यार करता है
कौन उसकी संग है आज
कौन पराया कौन उसे सही से जानता है
किसके दिल में वो इतनी करीब से थी
जो
कोई कई दिन लगातार उसके लिए रो सके
क्या कोई ऐसा है
जिसके मन में वह अभी भी भाता है
उतना ही सुंदर अभी उसे लगता है
मैं लिखती हूं एक खूबसूरत पंक्तियां
जिंदगी से दूर की
एक बदबूदार लास की
जिनके करीब जाने से भी लोग तकराते हैं
उसे देखकर दूर भाग जाते हैं
इतना बदबू आखिर किसको बरदाश्त हों
बस कुछ लोग हैं
जो उसके करीब आते हैं
उससे पानी से निकाल बाहर ले जाते हैं
एक लंबी प्रोसीजर के लिए
सरे गले लास्ट मे मोहित होने के लिए कुछ भी नहीं
बस वह सव अपना काम पूरा करते हैं
मैं लिखती हूं एक खूबसूरत पंक्तियां
पानी में परे एक शरी गली इलाज की
कौन है उसके अपने ढूंढने के लिए
उसकी मौत के दिन और तारीख जाने के लिए
मौत की वजह जाने के लिए
उसके शरीर की फिर से कई टुकड़े करने के लिए
या तो बस यूं ही ले जाकर कहीं और दफा देने के लिए
मैं लिखी हूं खूबसूरत पंक्तियां
खूबसूरती इंसान की जिंदगी ही होती है
और मौत के बाद जो आती है
वह घिन से भरी मन है
वो डर से भारी व्यक्तित्व है
जिंदा मन मोहकीं जा चुकी है
और उस जगह बचा है
वह बदबूदार पानी में तैरती हुई लास
वह खूबसूरती से भरी जिस्म के पंक्तियां बिल्कुल नहीं है
मैं लिखती हूं यह खूबसूरत पंक्तियां
लोग जो जताते हैं
जिस देखकर लुभाते हैं
मरने के बाद कुछ मिनट कुछ घंटे में ही
उस जिस्म की करीब जाने से तकराते से हैं
सांस छूट जाने के बाद कोई मूल्य नहीं
सब की झूठी चेहरा सामने आते हैं
वह रोते हुए चेहरा वह खिल खिलाकर हंसते हुए चेहरा
और एक लास जो दफनाया जाएंगे
या तो जलाए जाएंगे
जिंदगी झूठी शांन की एक शानदार चेहरा है
मौत एक ड्रामा सच की
आखिरी सफर और असलियत की आईना है
और यह शानदार कविता आपके लिए पेश है