मैं और मेरे अह्सास
आँखों
आँखों के इशारों से दिल का हाल सुना दिया हैं l
आज नीची नजर करके राज को छुपा दिया हैं ll
किसीके जाने से दुनिया नहीं रुकती स्वीकार कर l
दर्दों गम को भुलाकर हौसला दिखा दिया हैं ll
जिंदगी आगे बढने का नाम है बस यहीं सोच l
दिलों दिमाग से नाम पता सबकुछ मिटा दिया हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह