मैं और मेरे अह्सास
वक़्त भी ठहर जाता हैं
यार दोस्तों की मजलिस में वक़्त भी ठहर जाता हैं l
दिल एक अजीब सा चैन और सुकून को पाता हैं ll
भागती दौड़ती दुनिया की रफ़्तार से थक कर यहां l
जो आता दो पल के हसीं मज़ाक के लिए आता हैं ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह