"हर तरफ यहाँ चेहरे हैं सब अनजान से,
मिलते हैं मगर रहते हैं बहुत बेजान से।
भीड़ में भी दिल को एक तन्हाई सी घेरती है,
जाने ये दुनिया कैसी चालें चलती है।
हर शख्स यहाँ अपनी ही धुन में खोया है,
लगता है जैसे हर कोई यहाँ कुछ सोया है।
न कोई किसी का यहाँ दर्द पहचानता है,
हर कोई बस खुद को ही यहाँ जानता है।
इस अनजान सफर में कदमों की है बेबसी,
अपनों की तलाश में बीत रही हर ख़ुशी।