The Silent Painting’s First Breath - 6 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | इश्क के साये में - एपिसोड 6

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इश्क के साये में - एपिसोड 6

🌑 एपिसोड 6: जब इश्क़ ने क़ीमत माँगी
सुबह की पहली रोशनी खिड़की से कमरे में दाख़िल हुई, लेकिन आरव के लिए वह रोशनी किसी राहत की तरह नहीं थी।
उसकी आँखें खुलीं तो सबसे पहले उसे अपने हाथ पर बना वह काला निशान दिखा—
कल रात का सच, जो अब उसकी त्वचा में उतर चुका था।
निशान धड़क रहा था।
जैसे कोई ज़िंदा चीज़ हो।
“यह…”
आरव ने खुद से कहा,
“अब सिर्फ़ निशान नहीं है।”
कमरे में अजीब-सी खामोशी थी।
अनाया कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।
“अनाया?”
उसने पुकारा।
कोई जवाब नहीं।
दिन भर आरव बेचैन रहा।
पेंटिंग की दरार अब और गहरी हो चुकी थी, जैसे वह किसी सांस के इंतज़ार में हो।
आरव ने किताबें पलटीं, नोट्स बनाए, पुराने मंत्र ढूँढे—
लेकिन हर पन्ने पर एक ही बात लिखी थी:
मुक्ति की क़ीमत होती है।
रात होते-होते उसके हाथ का निशान और गहरा हो गया।
अब उसमें हल्की-सी जलन नहीं…
बल्कि खिंचाव था।
जैसे कोई उसे अपनी ओर बुला रहा हो।
बारह बजे के ठीक पहले अनाया प्रकट हुई।
आज वह बहुत कमज़ोर लग रही थी—
उसका चेहरा फीका, आँखों में डर और अपराधबोध।
“तुम दिन भर क्यों नहीं आईं?”
आरव ने सवाल किया, लेकिन उसकी आवाज़ में शिकायत नहीं थी।
अनाया ने नज़रें झुका लीं।
“क्योंकि आज अगर मैं आई…”
उसकी आवाज़ काँप गई,
“तो शायद आख़िरी बार आऊँ।”
आरव का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
“यह क्या मतलब है?”
अनाया उसके सामने आई।
आज पहली बार वह ज़मीन के बेहद करीब थी।
“देवांश ने जो निशान तुम्हें दिया है,”
वह बोली,
“वह सिर्फ़ क़ैद का चिह्न नहीं…
वह एक चुनाव है।”
“किस तरह का चुनाव?”
आरव ने पूछा।
अनाया की आँखें भर आईं।
“या तो वह निशान धीरे-धीरे तुम्हें पेंटिंग से बाँध देगा…
या फिर—
तुम उसी निशान की मदद से मुझे आज़ाद कर सकोगे।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
“और उसकी क़ीमत?”
आरव ने धीमे से पूछा।
अनाया ने सिर हिलाया।
“अगर तुमने मुझे आज़ाद किया…
तो तुम्हारा इस दुनिया से रिश्ता टूट सकता है।”
आरव मुस्कुरा दिया—
लेकिन वह मुस्कान बहुत थकी हुई थी।
“तो साफ़-साफ़ कहो,”
उसने कहा,
“तुम आज़ाद हो जाओगी…
और मैं साया बन जाऊँगा।”
अनाया रो पड़ी।
“मैं नहीं चाहती कि तुम यह रास्ता चुनो।”
आरव आगे बढ़ा।
आज पहली बार उसने उसका हाथ थाम लिया।
और इस बार—
वह हाथ खाली नहीं था।
अनाया की साँस अटक गई।
“तुम… मुझे छू पा रहे हो?”
“शायद,”
आरव ने कहा,
“क्योंकि मैं अब आधा वहाँ हूँ…
जहाँ तुम हो।”
उसकी बात सुनकर अनाया टूट गई।
“इश्क़ इतना बेरहम क्यों होता है?”
वह फुसफुसाई।
“क्योंकि वह सिर्फ़ पाने का नाम नहीं,”
आरव ने कहा,
“छोड़ने का हौसला भी माँगता है।”
अचानक कमरे में तेज़ हवा चली।
पेंटिंग का फ्रेम ज़ोर से काँपा।
वही भारी आवाज़ गूँजी—
“तुम्हें चुनने का हक़ नहीं है।”
देवांश का साया फिर उभर आया—
इस बार और ज़्यादा ताक़तवर।
“वह मेरी कृति है,”
उसने गुर्राकर कहा।
“और तुम मेरी अगली।”
आरव ने अनाया को अपने पीछे कर लिया।
“तुम कलाकार नहीं,”
उसने कहा,
“तुम कैदी बनाने वाले हो।”
साया हँसा।
“और तुम वही गलती दोहरा रहे हो—
प्यार को आज़ादी से ऊपर रखकर।”
आरव ने अपना हाथ उठाया।
निशान अब जल रहा था।
“नहीं,”
उसने कहा,
“मैं प्यार को क़ैद से बाहर ला रहा हूँ।”
कमरे में तेज़ रोशनी फैल गई।
निशान चमक उठा।
पेंटिंग में दरार और फैल गई—
जैसे कैनवास चीख रहा हो।
अनाया की आँखों में उम्मीद और डर दोनों थे।
“अगर तुम यह करोगे…”
वह रोते हुए बोली,
“तो मैं तुम्हें खो दूँगी।”
आरव ने उसकी ओर देखा—
बहुत प्यार से।
“अगर मैं यह नहीं करूँगा,”
उसने कहा,
“तो मैं खुद को खो दूँगा।”
उसने पेंटिंग की ओर हाथ बढ़ाया।
और उसी पल—
देवांश की चीख पूरे कमरे में गूँज उठी।
सब कुछ अचानक शांत हो गया।
आरव ज़मीन पर बैठा था।
उसकी साँसें तेज़ थीं।
अनाया उसके सामने खड़ी थी—
आज पहले से कहीं ज़्यादा स्पष्ट।
“दरार…”
उसने काँपती आवाज़ में कहा।
“अब पूरी हो चुकी है।”
आरव ने पेंटिंग की ओर देखा।
वह अब सिर्फ़ टूटी नहीं थी…
वह खुल रही थी।
लेकिन आरव के हाथ का निशान—
अब उसके दिल की तरफ़ बढ़ रहा था।
🌘 हुक लाइन (एपिसोड का अंत)
आरव समझ चुका था—
मुक्ति का दरवाज़ा खुल चुका है,
लेकिन अब सवाल यह था…
कौन इस दुनिया में बचेगा,
और कौन इश्क़ के साये में खो जाएगा।