Ashvdhaama: Ek yug purush - 13 in Hindi Science-Fiction by bhagwat singh naruka books and stories PDF | Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 13

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Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 13



कुंजर पास की गुफ़ा से बाहर निकलने के बाद बरसती बर्फ़ और उफनती हवाएँ पूरी घाटी को निगल रही थीं।
ज़ाराक और सिरिना दोनों तेज़ी से नीचे उतर रहे थे।
उनके पीछे दो और वाहन खड़े थे।


Black Falcon Unit, आतंकियों की एक निजी टास्क फोर्स, जो सिर्फ़ छाया में काम करती है।

ड्राइवर ने पूछा,

“सर, अंदर क्या मिला?”

ज़ाराक ने एक ठंडी, लंबी साँस ली 

“जो चाहिए था… उसका संकेत।

किसी ने वहाँ किसी को नहीं मारा…

वह वहाँ मौजूद था।” जो हमे उस मणि तक पहुंचा सकता है अकेले हम नहीं है उसके पीछे ओर भी कई ताकते है ,इस लिए हर कदम बड़ी चालाकी से रखना होगा ।
हर शब्द में ऐसा भय था मानो कोई अदृश्य चीज़ उनके पीछे खड़ी हो।

चलो गाड़ी निकालो।


रात के दो बजे।

ऑफिस की टॉप फ़्लोर पर सिर्फ़ एक कमरा जिस में हल्की बिजली जल रही थी उसकी रोशन ज्यादा दूर तक अपनी रोशन नहीं फैला रही थी ।

Situation Room 7.

वहाँ दो लोग बैठे थे

डिप्टी चीफ़ – आर्यन ठाकुर,

और साइंटिफिक डिविज़न हेड – डॉ. सान्वी राठौर।

सान्वी ने कंप्यूटर स्क्रीन पर रीअल-टाइम सैटेलाइट फुटेज दिखाते हुए कहा

“ये लो-फ्रीक्वेंसी शॉक वेव्स हैं जो कुंजर पास से मिली हैं।
पाँच सेकेंड की, लेकिन इतनी तीव्र… कि ये प्राकृतिक नहीं हो सकती।”

आर्यन ने स्क्रीन पर झुककर देखा।

वेव्स एकदम गोलाकार फैल रही थीं, जैसे किसी के आने या…
किसी के जागने से उत्पन्न हुई हों।

आर्यन धीमे बोला

“किसी मणि या आर्टिफ़ैक्ट का रिएक्शन?”

सान्वी ने कहा

“अगर हमें ये मानना पड़े कि कोई प्राचीन शक्ति आज भी सक्रिय है…

तो हाँ।
लेकिन कोई चीज़ इन वेव्स को कंट्रोल भी कर रही है।
ये फ्रीक्वेंसी मानव जनित नहीं है, पर किसी ने इसे छेड़ा है।”

आर्यन:
“आतंकी संगठन?”

सान्वी:
“या… कुछ और।”हमारी साइंस तकनीक से भी ऊपर है जिसका जिक्र समित ने पहले भी किया है उसका अंदाजा सही था ओर योगेश्वर अग्निवंश भी ।
वह वाक्य हवा में ठहर गया।

कहने को एक वैज्ञानिक थी, लेकिन उसकी आवाज़ मानो खुद डर को महसूस कर रही थी।

– रात का काफ़िला, सुनसान जगह वाला रास्ता 
ज़ाराक की कार पहाड़ों से नीचे उतरती जा रही थी।
रात की ठंड से शीशे जम रहे थे।


ड्राइवर धीरे-धीरे गाड़ी चला रहा था, तभी

टायर अपने आप रुक गए।

इंजन बंद हो गया।

सिरिना घबरा गई,

“क्या हुआ? कोई वायर कट? गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही है उतर कर देखना होगा ।

ड्राइवर बोला,

“सर… सिग्नल जा रहा है।

GPS, रेडियो, कैमरे… सब बंद।

जैसे कोई अदृश्य दीवार बन गई हो।”

ज़ाराक तुरंत समझ गया

“यह हवा नहीं… यह हस्तक्षेप है। कोई भी गाड़ियों से नीचे नहीं उतरेगा 
वही शक्ति… हमारा पीछा कर रही है।”
पल भर के लिए सन्नाटा था।
इतना गहरा कि इंसान अपनी सांस भी सुन सकता था।
और ठीक उसी पल—
ऊपर पहाड़ी से बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा खुद-ब-खुद गिरा।
कोई इंसान नहीं था वहाँ।
न कोई जानवर।
कुछ भी नहीं। जराक ने आंखे बंद की ओर फिर अचानक खोली सभी अपनी गाड़िया पीछे लो 
लेकिन बर्फ का गिरना बहुत सटीक समय पर हुआ—
उनकी कार के पीछे, ठीक 5 सेकेंड बाद।
सिरिना की आँखें फैल गईं—
“यह संयोग नहीं…”
ज़ाराक:
“हमसे कोई खेल रहा है।
अदृश्य…
लेकिन जागा हुआ।” उसको जगा कर हमे बड़ी गलती कर दी है 
गाड़ी जैसे ही चालू हुई,
सिरिना ने रियर मिरर में देखा—
पीछे काला अँधेरा,
लेकिन जैसे कोई छाया हल्की सी हिल रही हो।
वह देख ही रही थी कि अचानक—
मिरर में दरार पड़ गई।
अपने आप।
सिरिना की सांस रुक गई।
ज़ाराक ने बिना पीछे देखे कहा—
“मत देखो।
पीछा महसूस किया जाता है…
देखा नहीं।”पीछे देखने का मतलब है डर जगह बना लेता है 


दूसरी तरफ 
यह आतंक का सबसे गहरा ठिकाना था। यहां पर कई संगठन मौजूद रहते थे गुंडे बदमाश गैंगस्टर कई देशों के राजनेता 
एक पुरानी किले जैसी जगह, जहाँ तिलिस्म-K और Red Group मिलकर नई रणनीति बना रहे थे।
मुख्य कमांडर अबू हमजा एक सैटेलाइट मैप पर उंगली रखते हुए बोला—
“अश्वत्थामा की मणि अगर हमारे पास आ गई
तो दुनिया की किसी भी स्पाई एजेंसी का कोई एजेंट जिंदा नहीं बचेगा।”पूरी दुनिया पर हमारा कब्जा होगा 
पास खड़ा एक युवा  धीमे स्वर में बोला—
“लेकिन कहा जाता है कि मणि के असली मालिक का पीछा एक श्राप भी करता है…”
हमजा ने घूरकर कहा—
“श्राप? हम दैत्य गुरु शुक्राचार्य के अधीन है श्रापों से डरेंगे?
हम…”
उसकी बात अचानक रुक गई।
कैंप की लोहे की दीवार चिरररररर की आवाज़ के साथ हल्की सी झुकी।
मानो किसी ने बाहर से घूंसा मारा हो।
गार्ड्स दौड़े।
लेकिन बाहर… कुछ नहीं था।
न इंसान,
न जानवर,
न हवा।
कुछ भी नहीं।
कमांडर की आवाज़ काँप गई—
“कितनी दूरी है ज़ाराक की टीम की?”
युवा आतंकी बोला—
“सर… 60 किलोमीटर।
लेकिन…”
हमजा चीखा—
“लेकिन क्या!”
उसने स्क्रीन पर दिखाया—
उनकी कार के पीछे एक अजीब-सी गर्मी और दाब का पैटर्न दिख रहा था।
ठीक वही पैटर्न…
जो इंसान नहीं छोड़ सकता।
हमजा की आँखें डर से फैल गईं।
“वह…
उन्हें फॉलो कर रहा है।” अच्छा है वो नहीं तो ये सही यही हमे उस मणि तक पहुंचने में हेल्प करेगा क्योंकि जैसा कि हमने गुरु शुक्राचार्य से सुना है मणि को पाना आसान नहीं है उसके लिए एक योद्धा से लड़ना होगा । लेकिन उससे पहले हमें इसको अपने बस में करना होगा क्योंकि ये जो भी है बलि मांगता है 


उधर 
डॉ. सान्वी ने सारी वेवफॉर्म दोनों हाथों से पकड़कर टेबल पर रख दी।
“आर्यन…
जो भी जाग गया है सारी बातें सच होती नजर आ रही है ।
वह सिर्फ़ उनके के पीछे नहीं है।
यह… एक चेतावनी भी है।”
आर्यन धीरे बोला—
“किसके लिए?”
सान्वी की आँखें गहरी हो गईं—
“हम सबके लिए।” मानवता के लिए दुनिया के लिए लेकिन उसको कैसे काबू किया जाए ये तो योगेश्वर अग्निवंश की डायरी में नहीं लिखा ,इसके लिए हमे इन लोगों पर अपना फोकस रखना होगा । सही समय का इंतजार करना होगा ।
ज़ाराक का काफ़िला अब एक पुल पार कर रहा था।
नीचे नदी तेज़ बह रही थी।
तभी—
पुल के दोनों सिरों पर बर्फ खुद-ब-खुद गिरने लगी।
मगर जिस तरीके से —
मानो किसी ने जानकर रास्ता बंद किया हो।
ड्राइवर चिल्लाया—
“सर, हम फँस गए!”
ज़ाराक की आँखें चमकीं—
“नहीं।
वह हमें कहीं जाने नहीं दे रहा।”
सिरिना डरती हुई बोली—
“क्या वह हमें मार देगा?”
ज़ाराक ने आसमान की तरफ देखते हुए धीमे स्वर में कहा—
“नहीं…
वह सिर्फ़ देख रहा है।
और इंतज़ार कर रहा है…
उस चीज़ के मिलने का
जिसकी खोज हम कर रहे हैं।” ये हमारी परीक्षा की घड़ी है तुम बस डरना नहीं बाकी मुझ पर छोड़ दो 

अचानक हवा में एक बहुत पुरानी, टूटी हुई सांस जैसी आवाज़ आई—
“अश्व धामा,,
लेकिन हमला नहीं होता।
सिर्फ़ मौजूदगी…
भारी, डरावनी, और अदृश्य।
अश्वत्थामा अभी भी सिर्फ़ महसूस होता है। उसको लेकिन 
दिखता नहीं। उसको भी तलाश है गुरु शुक्राचार्य ने सही कहा था जितना इंतजार तुम्हे उससे कही इंतजार इसको भी है ।


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लेखक भगवत सिंह नरूका ✍️