Deewane Ki Diwaniyat - Episode in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 10

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 10

बगावत के सुर
एपिसोड 10: अंतिम जंग, नई सुबह
)दरभंगा की सर्द हवाएँ अब गर्माहट से लबरेज़ हो चुकी थीं। रेलवे स्टेशन प्रोजेक्ट चमक-दमक के साथ तैयार खड़ा था—चकाचौंध प्लेटफॉर्म, आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रेनों की सीटी गूँज रही। उद्घाटन का दिन करीब था। पृथ्वी राठौर और उनकी पत्नी सनाया राठौर (पहले ठाकुर) हनीमून के बाद नई जिंदगी बसा चुके थे। हर सुबह सनाया चाय बनाती, पृथ्वी साइट का निरीक्षण करता। विक्रम, सनाया का सौतेला भाई, पूरी तरह सुधर चुका—अब साइट का सुपरवाइजर। रमेश सिक्योरिटी चीफ। लेकिन जेल से भानु प्रताप का मैसेज भूल न पाए। "मेरा आखिरी हथियार बाकी। स्टेशन उद्घाटन पर देखना।" पृथ्वी ने पुलिस अधीक्षक को अलर्ट किया। सनाया ने कंधा थपथपाया, "शायद ब्लफ है। हम खुश रहें, पृथ्वी। हमारा परिवार पूरा हो रहा।"उद्घाटन की धूम
उद्घाटन का दिन आया। पूरा शहर सज-धजकर जुटा। मंत्रियों का काफिला आया, बैंड-बाजे बज रहे, फूलों की पंखुड़ियाँ बरस रही। मंच पर पृथ्वी ने माइक थामा। "ये स्टेशन सिर्फ ट्रेनों का स्टेशन नहीं, दरभंगा की बगावत का अंतिम अध्याय है। पुरानी दुश्मनियाँ मिट गईं—खून का बदला प्यार ने जीत लिया। नई शुरुआत हो रही!" तालियों की गड़गड़ाहट। सनाया पहली पंक्ति में बैठी ताली बजा रही, आँखें नम। विक्रम बैकस्टेज सुरक्षा संभाल रहा, रमेश भीड़ स्कैन कर रहा। बच्चे गुब्बारे छोड़ रहे, महिलाएँ नाच रही।तभी संदिग्ध ट्रक साइट के बैक गेट से घुसा। ड्राइवर उतरा—भानु प्रताप का पुराना वकील रघु, चेहरा काला पड़ा। ट्रक के पीछे विस्फोटक से लदा। "ठाकुर साहब का अंतिम आदेश—ये स्टेशन उड़ा दो! राठौर का सपना चूर हो!" रघु ने बम का टाइमर सेट किया। पृथ्वी ने मंच से देखा, दिल धक् से हो गया। "रुको!" वो दौड़ा, भीड़ चीरता। रघु ने बंदूक तानी। पहली गोली चली—रमेश ने बॉडी से कवर दिया, कंधा छलनी। विक्रम ने ट्रक की चाबी छीनी। सनाया चीखी, "पृथ्वी, संभलो!" पुलिस का सायरन गूँजा। झड़प मची—गोलीबारी, लात-घूँसे। रघु को रमेश ने पटक दिया। लेकिन टाइमर टिक-टिक कर रहा—4 मिनट बाकी!क्लाइमेक्स: बम डिफ्यूज
पृथ्वी ने विक्रम से चिल्लाया, "ट्रक को बाहर ले जा, साइड रोड पर!" विक्रम ने ट्रक स्टार्ट किया। इंजन गर्जा, वो तेजी से बाहर भागा। सनाया दौड़ी, "विक्रम!" ट्रक साइड रोड पर पहुँचा, लेकिन टाइमर खत्म—बूम! विशाल धमाका, ट्रक हवा में उड़ा, आग की लपटें। धुआँ चारों तरफ छा गया। पूरा स्टेडियम साँस थामे। सनाया रो पड़ी, "नहीं!" पृथ्वी दौड़ा। धुएँ से विक्रम लंगड़ाता निकला—जख्मी, लेकिन जिंदा। हाथ में डिफ्यूज्ड वायर। "भाई... डिफ्यूज कर दिया आखिरी सेकंड में। स्टेशन सुरक्षित!" सनाया ने गले लगा लिया। पृथ्वी ने सलाम ठोका। "तूने परिवार बचाया, विक्रम। भानु प्रताप का खून, लेकिन दिल साफ।"भानु प्रताप का अंत
जेल में खबर पहुँची। भानु प्रताप टीवी पर धमाका देख टूट पड़ा। वार्डन ने पूछा, "क्या कहना है?" भानु ने सिर झुका लिया। "मेरी बगावत हार गई। रघु ने कबूल लिया—मेरा आखिरी हथियार विक्रम था, लेकिन वो बदला भूल गया। अब कुछ बचा ही नहीं।" कोर्ट ने उम्रकैद कायम रखी। रघु को 20 साल।मंच पर उद्घाटन फिर शुरू। मंत्री ने रिबन काटा। पहली ट्रेन सीटी बजा कर आई। पृथ्वी-सनाया ने प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर तालियाँ सुनीं। शहर ने जश्न मनाया। शाम को घर लौटे। सनाया ने कहा, "सब खत्म। अब हमारा बच्चा आएगा—स्टेशन की तरह मजबूत, प्यार से भरा।" पृथ्वी हँसा, गले लगाया। "हाँ, बेटा हो या बेटी—राठौर-ठाकुर का वारिस। बगावत के सुर हमेशा के लिए शांत।"एपिलॉग: नई सुबह
महीनों बाद स्टेशन चहल-पहल से गुलजार। पृथ्वी स्टेशन मैनेजर, सनाया सोशल वर्कर—गरीबों के लिए ट्रेन टिकट स्कीम चला रही। विक्रम पार्टनर, शादीशुदा। रमेश प्रमोशन पा चुका। एक शाम बालकनी में सनाया बोली, "याद है वो पुराना रुमाल? हमारी कहानी का पहला पन्ना।" पृथ्वी ने गहरा चुंबन दिया। "अब किताब पूरी हो गई। बगावत के सुर प्यार के गीत बन गए।" दूर ट्रेन की सीटी गूँजी—नई यात्राओं, नई उम्मीदों की। दरभंगा बदला, जिंदगियाँ बदलीं।समाप्त