Mout ki Dastak - 21 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 21

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 21

👻 “दरभंगा की हवेली का साया”

बिहार के दरभंगा शहर से थोड़ा दूर, एक पुरानी हवेली थी। लोग उसे “साया हवेली” कहते थे। दिन में वह बस एक खंडहर जैसी इमारत लगती, लेकिन रात होते ही वहां से अजीब-अजीब आवाज़ें आने लगतीं — जैसे कोई रो रहा हो, कोई हंस रहा हो, या कोई भारी कदमों से सीढ़ियाँ उतर रहा हो।

गांव के लोग कहते थे कि उस हवेली में सौ साल पहले एक लड़की की दर्दनाक मौत हुई थी। उसका नाम था माधवी। वह बहुत खूबसूरत थी, लेकिन उसकी शादी जबरदस्ती एक अमीर जमींदार से कर दी गई थी। कहते हैं, शादी की पहली रात ही वह हवेली की ऊँची बालकनी से गिरकर मर गई। किसी ने कहा उसने आत्महत्या की, किसी ने कहा उसे धक्का दिया गया। पर सच क्या था, कोई नहीं जानता।

समय बीत गया। हवेली वीरान हो गई। लेकिन माधवी की आत्मा… वहीं रह गई।

एक दिन शहर से चार दोस्त — आरव, निशा, करण और सिया — एडवेंचर के लिए उस हवेली में जाने का प्लान बनाते हैं। उन्हें भूत-प्रेत की कहानियों पर यकीन नहीं था।

“ये सब बेकार की बातें हैं,” आरव हंसते हुए बोला।

“हाँ, चलो आज साया हवेली का सच पता लगाते हैं,” करण ने कहा।

रात के करीब दस बजे वे चारों हवेली के गेट के सामने खड़े थे। टूटा हुआ लोहे का गेट हवा में चर्र-चर्र की आवाज़ कर रहा था। अंदर घुसते ही ठंडी हवा का झोंका आया, जैसे किसी ने कान के पास फुसफुसाया हो — “वापस जाओ…”

निशा ने घबराकर आरव का हाथ पकड़ लिया।

“तुमने सुना?” उसने धीमे से पूछा।

“हवा है बस,” आरव ने खुद को भी दिलासा देते हुए कहा।

वे अंदर बढ़े। हवेली के दीवारों पर पुरानी तस्वीरें टंगी थीं, जिन पर धूल जमी थी। अचानक सिया की नजर एक तस्वीर पर पड़ी — एक लड़की की फोटो, जिसकी आंखें अजीब तरीके से चमक रही थीं।

“ये माधवी होगी…” सिया ने कहा।

तभी अचानक पूरी हवेली की बत्तियाँ (जो पहले से बंद थीं) एक पल के लिए जल उठीं। सब चौंक गए।

“यह कैसे संभव है?” करण बुदबुदाया।

अचानक ऊपर से पायल की आवाज़ आई — छन… छन… छन…

चारों ने एक-दूसरे को देखा। सीढ़ियों की तरफ से सफेद साड़ी में एक आकृति धीरे-धीरे उतर रही थी। उसका चेहरा घूंघट से ढका था। हवा में ठंडक बढ़ गई। निशा की सांसें तेज हो गईं।

“ये… ये कोई मज़ाक नहीं है,” उसने कांपते हुए कहा।

आकृति धीरे-धीरे उनके करीब आई। जैसे ही उसने घूंघट हटाया, उसका चेहरा डरावना था — आंखें पूरी सफेद, होंठों पर खून जैसा लाल रंग।

“तुम लोग… क्यों आए हो?” उसकी आवाज़ गूंज उठी।

आरव हिम्मत करके बोला, “हम सच जानने आए हैं… तुम्हारे साथ क्या हुआ था?”

एक पल के लिए सब शांत हो गया। फिर अचानक हवेली के दरवाजे अपने-आप बंद हो गए। खिड़कियाँ जोर-जोर से बजने लगीं। दीवारों पर खून जैसे लाल निशान उभर आए।

माधवी की आत्मा चीख पड़ी —

“मुझे धक्का दिया गया था! मेरे अपने पति ने… इस हवेली की दौलत के लिए!”

अचानक हवेली के एक कोने में एक परछाईं उभरी — एक आदमी की, जिसके हाथ खून से सने थे।

करण चिल्लाया, “ये क्या हो रहा है!”

माधवी की आत्मा रोते हुए बोली, “मैं तब तक शांति नहीं पा सकती, जब तक मेरा सच सबके सामने नहीं आएगा।”

सिया ने कांपते हुए कहा, “हम… हम तुम्हारी मदद करेंगे।”

तभी अचानक करण के गले पर अदृश्य हाथों का दबाव महसूस हुआ। वह जमीन पर गिर पड़ा।

“बचाओ…!” वह हांफते हुए बोला।

आरव ने जोर से चिल्लाकर कहा, “हम वादा करते हैं! हम तुम्हारी कहानी सबको बताएंगे!”

जैसे ही उसने ये कहा, करण का गला छूट गया। हवेली में सन्नाटा छा गया। सफेद साड़ी वाली आकृति धीरे-धीरे धुंध में बदल गई।

अगले दिन चारों दोस्तों ने गांव में सबको माधवी की सच्चाई बताई। पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए। पता चला, सच में उस जमींदार पर शक था, लेकिन पैसे और ताकत के कारण मामला दबा दिया गया था।

गांव वालों ने हवेली में पूजा करवाई। माधवी की आत्मा के लिए दीप जलाए गए।

उस रात के बाद से हवेली में कभी कोई अजीब आवाज़ नहीं आई।

लेकिन…

एक साल बाद, जब हवेली को तोड़ने का काम शुरू हुआ, मजदूरों ने बालकनी के पास एक पुरानी पायल पाई। जैसे ही उन्होंने उसे छुआ, हवा में फिर वही आवाज़ गूंजी —

“सच दबाया नहीं जा सकता…”

और उसी रात, एक मजदूर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया।

आज भी लोग कहते हैं, दरभंगा की उस हवेली में कभी-कभी सफेद साड़ी में एक परछाईं दिखती है… जो अपने सच की रखवाली कर रही है।

अगर कभी रात में वहां से गुजरें…

तो ध्यान रखिएगा…

कहीं कोई आपको देख तो नहीं रहा…