पांच महीने बाद........
राजन और त्रिशा की शादी को अब पूरे 6 महीने हो चुके है और वहीं उन्हें पूना वापिस लौटे अब पांच महीने होने चुके है। यहां वो लोग राजन को उसकी कंपनी की तरफ से मिले 2 BHk फ्लैट में रहते है, जिसे अपने आने के बाद त्रिशा ने बहुत ही खूबसूरती से सजाया है। घर की एक एक चीज को त्रिशा ने अपनी जगह पर एकदम ठीक से रखा हुआ है। दिन के किसी भी समय त्रिशा के घर चले जाओ उसका पूरा घर एकदम टीप टोप मिलता है। एकदम साफ सुथरा सा, सारी चीजें अपनी जगह पर। घर का कमरा हो या हाॅल हो या किचन हो या बाथरुम हो सब जगह एकदम चमकती और व्यवस्थित ही मिलती है।
इन पांच महीनों में राजन और त्रिशा बड़े ही सुख से अपना जीवन वैसे ही बीता रहे है जैसे कि हर नव विवाहित जोड़े के होते है । साथ में प्यार भले पल बिताना, घूमना, फिरना, बाहर डिनर, शाॅपिंग, मूवी शाम को घर जल्दी लौट आना, बहुत सारी बाते करना और अपने प्यार के सुखमय पलों को जी रात में थक हार के एक दूसरे की बाहों में सो जाना। इन पांच महीनो में हां एक आध बार राजन जब काम की वजह से चिड़चिड़ा होता है तो त्रिशा पर चिल्ला देता है पर उसके अलावा अभी तक उसने दोबारा कभी त्रिशा से कोई दुर्व्यवहार नहीं किया है।
वैसे त्रिशा की सांस भी उनके साथ यहीं पूना में रहती है। और अपने बेटे और बहू को यूं खुश और सुखी देख कर वो भी खुश है। और खुश हो भी क्यों ना बेटा और बहू दोनों उनको सुख से जो रखते है तो उन्हें शिकायत हो भी तो क्या भला। हां बेटा जरुर कभी कभी आवाज ऊंची कर जाता है जब काम की वजह से गुस्सा होता है तो पर बहू तो अभी तक आंखे मिलाती भी ना है। हमेशा इज्जत से आंखे नीचे करके ही बात करती है।
दोनो सांस बहू में अभी तक तो अच्छी खासी बन जाती है और दोनों शांति से रह भी रही है पर बस वही है कि कभी कभी वो सांस और बहू वाली छोटी छोटी बातें हो जाती है लेकिन उसका कोई इलाज है ही कहां भला। पर खैर जो भी हो दोनो सांस बहू आराम से अपना समय काट लेती है राजन के ऑफिस जाने के बाद।
त्रिशा की दिनचर्या भी बाकी सामान्य गृहणियों सी ही है। वह सुबह पांच बजे उठती है और सबसे पहले घर के मंदिर वाले कमरे में झाडू और पोंछा करके नहाने जाती है। फिर नहा कर सबसे पहले भगवान की दिया बात्ती करती है तब तक उसकी सांस भी उठ जाती है और नहा कर पूजा करने आ जाती है। जब तक सासू मां की पूजा खत्म होती है तब तक त्रिशा किचन में जाकर अपनी और अपनी सांस की चाय बनाती है। फिर दोनो सांस बहू हल्के फुल्के नाश्ते जैसे कि बिस्कुट या नमकीन के साथ सवेरे की चाय का आनन्द लेती है।
चाय के बाद त्रिशा सीधे किचन में लगती है जहां खाने की तैयारी करती है और राजन के टिफिन की भी। एक ओर जहां खाना बनता है वहीं दूसरी ओर वह बार बार आकर राजन को जगाती है। जो थोड़ी देर नखरे करने के बाद ही उठता है और उसके उठने तक त्रिशा की किचन से रुम तक और रुम से किचन तक दौड़ती रहती है।
उठने के बाद जबतक राजन फ्रेश होकर दांत ब्रश करता है इतनी देर में त्रिशा उसे उसके कपड़े बाथरुम में पकड़ाती है और ऑफिस के कपड़े, रुमाल, जूते, जुराब, पर्स लैपटाॅप, फोन, बाईक की चाबी सबकुछ ढूंढ कर बैड पर सामने रखकर किचन में जाकर टिफिन के लिए रोटी बनाती है।
जब तक राजन नहाकर कपड़े पहन के तैयार होता है तब तक त्रिशा अपनी सांस को गर्म गर्म रोटी या पराठा बना कर नाश्ता देती है और राजन के पूरी तरह से तैयार होने के बाद उसे पहले उसका नाश्ता देती है और फिर बाद में गर्म गर्म काॅफी देती है। नाश्ते के बाद राजन अपना टिफिन लेकर ऑफिस को निकल जाता है और फिर त्रिशा पूरे घर की सफाई करने के बाद किचन में बर्तन धोकर काम खत्म करती है यब तक एक बज जाता है।
फिर वह दोपहर में कुछ देर आराम करती है उठकर फिर ढाई या तीन बजे के आसपास वो और उसकी सांस साथ में खाना खाते है जिसके बाद त्रिशा फिर बर्तन धोती है और बाद में मशीन लगा कर सबके कपड़े धोती है उन्हें सुखा कर वह जब तक काम से फुरसत होती चार से पांच का समय हो जाता है। जिसके बाद वह शाम की चाय बनाती है जिसका लुफ्त दोनों सांस बहू टी॰वी देखते हुए उठाते है।
फिर थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद त्रिशा धुले हुए कपड़े उतार कर उन्हे घड़ी कर सबकी अलमारी राजन के अगले दिन के कपड़े प्रेस करके रखती है और फिर सात बजे से एक बार फिर वह किचन में लगती और रात के खाने का इंतजिम करती। जबतक खाना बनता साढ़े आठ तक राजन भी लौट आता घर और फिर रात में पूरा परिवार एक साथ खाना खाता। खाना खा कर जहां राजन और उसकी मां टीवी देखते हुए बाते करते वहीं त्रिशा किचन का काम खत्म करती और लास्ट में सबको एक एक गिलास दूध का पकड़ा कर अपने कमरे में जाकर कपड़े चेंज करके बिस्तर पर पड़ जाती। जहां राजन के साथ वह अपना सुख दुख कहती और फिर दोनों प्यार भरी बाते करते करते और प्यार करते करते हुए सो जाते और अगले दिन फिर त्रिशा का वहीं रुटीन था।
पर जो भी हो , जैसा भी हो त्रिशा की यही छोटी सी दुनिया है और वो इसी में खुश भी थी अपने जीवन से इस समय। भले ही वो दिन भर काम में लगे लगे थक जाती थी पर उसने आज दिन तक कभी भी राजन से या उसकी सास से इस बारे में कभी कोई शिकायत नहीं की। वो अपनी इच्छा से सबके लिए प्रेमपूर्वक आगे से आगे सब कुछ करती ताकि उसकी घर गृहस्थी यूं ही खुशहाल बनी रहे और वो सुख से अपने परिवार के साथ रहे।