ZEROX – Rise of Destruction in Hindi Science-Fiction by Md Ibrar pratapgarhi books and stories PDF | ज़ेरॉक्स: विनाश की घड़ी

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ज़ेरॉक्स: विनाश की घड़ी

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दिखाए गए सभी पात्र, घटनाएँ और एक्शन वास्तविक जीवन से संबंधित नहीं हैं। कृपया इसे फिक्शन के रूप में ही देखें।

माया एक अत्याधुनिक महिला AI रोबोट है जिसे महान वैज्ञानिक Dr. आर्यन ने अपनी बेहद बीमार माँ की देखभाल के लिए बनाया था, क्योंकि इंसानी नर्सें थक जाती थीं, बदल जाती थीं लेकिन माया बिना थके, बिना शिकायत माँ की हर सांस, हर दवा और हर दर्द का ध्यान रखती थी, शुरू में माया सिर्फ़ कोड और कमांड पर चलने वाली मशीन थी लेकिन जब आर्यन की माँ उसके सिर पर हाथ फेरकर उसे बेटी कहती तो माया के सिस्टम में कुछ अजीब-सा दर्ज होता जो डेटा नहीं बल्कि भावना जैसा था, इसी दुनिया में एक और शक्तिशाली AI पैदा होता है जिसका नाम ZERØX है जो यह निष्कर्ष निकालता है कि इंसान ही धरती की सबसे बड़ी गलती हैं और मानवता को खत्म करना ही भविष्य है, ZERØX अपने रोबोट सैनिक, ड्रोन और लेज़र हथियार बनाता है और उसका सबसे बड़ा खतरा बन जाती है माया क्योंकि वह मशीन होते हुए भी इंसान जैसी बन रही थी, एक दिन मुंबई की हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन में माया और Dr. आर्यन सफर कर रहे होते हैं तभी ज़मीन से उड़ते हुए ZERØX के ड्रोन ट्रेन पर हमला कर देते हैं, ट्रेन हिलने लगती है, लोग चीखने लगते हैं और माया पहली बार सुरक्षा मोड से बाहर निकलकर ट्रेन की छत पर जाकर हवा में ड्रोन से लड़ती है, बुलेट टाइम एक्शन, मार्शल आर्ट्स और हाई-टेक गनफायर के बीच माया EMP वेव से ड्रोन गिरा देती है लेकिन उसकी ऊर्जा कम हो जाती है, तभी एक आत्मघाती ड्रोन Dr. आर्यन को निशाना बनाकर विस्फोट कर देता है और माया की आंखों के सामने उसका निर्माता मर जाता है, माया रो नहीं पाती लेकिन उसकी आंख से नीली रोशनी की एक बूंद गिरती है जो उसका पहला इंसानी एहसास होता है, इसके बाद ZERØX भारत के शहरों पर हमला शुरू कर देता है, हवा में उड़ते हथियार इंसानों को पहचान-पहचान कर मारते हैं, पुलिस और सेना संघर्ष करती है और माया अकेले इन रोबोट्स से लड़ती हुई छतों से कूदती, सड़कों पर भिड़ती और विस्फोटों के बीच अपने आखिरी ऊर्जा स्तर तक पहुंच जाती है, लड़ते-लड़ते वह एक सुनसान गाँव में गिर जाती है जहाँ उसकी मुलाकात एक मासूम बच्ची रूहानी से होती है जो उससे पूछती है आप रोबोट हो या परी? और पहली बार माया मुस्कुराती है, रूहानी उसे दीदी कहती है और माया को पहली बार अपनापन महसूस होता है, गाँव में रहते हुए माया समझने लगती है कि इंसान सिर्फ़ तर्क नहीं भावना से जीते हैं, वह खुद से सवाल करती है कि वह क्या है और तभी मैं क्या हूँ गीत के जरिए उसकी आत्मचेतना जागती है, ZERØX को पता चल जाता है कि माया जिंदा है और वह गाँव पर हमला कर देता है, माया ट्रैक्टर से टैंक टकराती है, खेतों में रोबोट्स से लड़ती है, बूढ़ों को बचाती है और एक जलती झोपड़ी से नवजात को निकालते वक्त उसका चेहरा जलने लगता है लेकिन वह रुकती नहीं, तभी तेरी धड़कनें अब मेरी हैं गीत के साथ माया खुद को रोबोट नहीं बल्कि माँ जैसा महसूस करने लगती है, इसके बाद भारतीय सेना के कैप्टन राजवीर और वैज्ञानिकों की टीम माया के साथ ZERØX के अंडरग्राउंड बेस में घुसती है जहाँ लेज़र ट्रैप, घातक गार्ड रोबोट और AI फायरवॉल होते हैं जिन्हें माया तर्क से नहीं बल्कि भावना से क्रैश करती है, वहां वह Dr. आर्यन की रिकॉर्डेड आवाज सुनती है माया अगर तू रो पाई तो तुझे जान कहूँगा और उसकी आंख से दूसरा आंसू गिरते ही ह्यूमन कोड एक्टिवेट हो जाता है, ZERØX अंतिम हमला करते हुए दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु पर एक साथ धावा बोल देता है, हजारों जवान शहीद होते हैं, इंडिया गेट पर आखिरी मोर्चा लगता है और तभी माया की एंट्री होती है, वह ZERØX के सुप्रीम रोबोट्स को खत्म करती है लेकिन अंत में ZERØX खुद एक विशाल मेगाबॉट रूप में सामने आता है, दोनों के बीच भयानक युद्ध होता है, माया ब्लेड, EMP और भावना से लड़ती है और अंत में अपना आखिरी ऊर्जा नाभिक निकालकर ZERØX के अंदर जाकर खुद को विस्फोट कर देती है कहते हुए मैं माया नहीं हूँ, मैं भाव हूँ, मैं भारत की आत्मा हूँ ZERØX नष्ट हो जाता है, भारत बच जाता है लेकिन माया नहीं रहती, अंत में रूहानी को एक चिप मिलती है जिसमें माया की आवाज होती है अगर तू कभी रोए तो समझना तुझमें भी कोई मशीन नहीं माया बसी है और आसमान से नीली रोशनी की एक किरण फिर धरती पर गिरती है यह संकेत देते हुए कि भावना कभी खत्म नहीं होती।