उस भयावाह रात के बाद जब अगली बार जब त्रिशा की आंख खुली तो उसने खुद को अपने बिस्तर पर चादर में लिपटा पाया। उसकी आंख जैसे ही खुली तो उसने महसूस किया कि उसका पूरा शरीर इस समय दर्द से टूट रहा है। त्रिशा ने करवट लेनी चाही पर पूरे शरीर में एक अकड़न सी महसूस की। वह दर्द से कराह उठी पर तभी उसने महसूस किया कि जैसे कोई हल्के हल्के गर्म पानी से उसके शरीर की सिकाई कर रहा हो। और उस सिकाई के कारण उसे काफी राहत मिली और उस राहत के पाते ही फिर एक बार वो सुकुन से सो गई।
उसके बाद जब अगली बार त्रिशा की आंख खुली तो दर्द पहले से काफी कम था। और वो बेहतर महसूस कर रही थी, इसलिए त्रिशा ने उठने की कोशिश की पर उसने जैसे ही उठना चाहा तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा और कहा,"अरे तुम उठो मत प्लीज!!! लेटी रहो!!!!! आराम करो।।।।।। तुम्हारे शरीर को इस समय आराम की जरूरत है।"
अपने लिए इतनी चिंतित आवाज को सुनकर त्रिशा ने भावुक होकर उस ओर देखा तो राजन को वहां बैठा पाया जो बड़ा चिंतित सा होकर त्रिशा को देख रहा था। लेकिन अपने आगे राजन को देखकर त्रिशा को एकाएक कल रात में हुई सारी घटनाएं, वो अपमान, वो कटु शब्द, वो जोर जबर्दस्ती, सब कुछ..... , सब कुछ त्रिशा की आंखों के आगे सजीव हो गया। और उन सब घटनाओं की याद आते ही त्रिशा अंदर तक डर गई लेकिन दिल के किसी कोने में राजन के उस व्यवहार के कारण उसके लिए घृणा और कुंठा के भाव ने भी त्रिशा के मन में जन्म ले लिया।
त्रिशा ने राजन का हाथ झटका और राजन से दूर हो खुद को चादर सहित समेटने लगी। और अंत में बैड के दूसरी ओर राजन से मुंह फेर कर बैठ गई। पर तभी त्रिशा की नजर साईड में बैड के पास रखे मग और गीले कपड़े पर गई और अचानक एक विचार उसके मन में आया कि कहीं राजन ने ही तो उसकी सिकाई नहीं की थी???? पर वो ऐसा क्यों करेगा। त्रिशा ने अपने मन में आए विचार को हटाया और एक ओर मुंह करके बैठ गई।
त्रिशा को यूं डरा सहमा और खुद से भागता देख राजन उसके पास आया और त्रिशा का हाथ अपने हाथ में लेने लगा। पर राजन के छूते ही त्रिशा ने उसका हाथ दूर हटा दिया और अपना हाथ चादर के अंदर कर खुद को चादर से पूरी तरह ढक कर बैठ गई। त्रिशा के ऐसे व्यवहार के बाद राजन ने दोबारा उसे छूने की कोशिश नहीं की और ना ही कोई जबर्दस्ती की। वह वहीं से बैठे बैठे बोला," त्रिशा!!!!!!!"
लेकिन त्रिशा ने उसकी ओर मुड़कर भी ना देखा। पर फिर भी राजन ने कहना जारी रखा और बोला,"त्रिशा, मैं नहीं जानता यार कि कल मुझसे क्या हुआ है !!!!!!!! पर मैं इतना जरुर जानता हूं कि जो कुछ भी हुआ वो अच्छा नहीं था और ऐसा हमारे बीच या तुम्हारे साथ होना भी नहीं चाहिए था। मै मानता हूं कि मुझसे कल बहुत कुछ गलत हुआ है क्योंकि इसका सबूत मुझे इस कमरे की हालत और तुम्हारी हालत देख कर हो गया था।
मेरा यकीन मानो त्रिशा जब मेरी आंख आज सुबह खुली और मैने इस कमरे की ओर तुम्हारी जो दुर्दशा देखी मै खुद दंग और हैरान था। मुझे खुद पर बहुत घिन और गुस्सा भी आया पर......"
"लेकिन त्रिशा, यार यकिन करो मेरा कल जो कुछ भी हुआ वो केवल नशे की हालत में हुआ था!!!!!!!!!"
" मैं जानबूझ कर कभी तुम्हारे साथ यह सब नहीं कर सकता था यार!!!!!!!!!! और कम से कम कल तो बिल्कुल भी नहीं कर सकता था मैं!!!!!!!!
" आई एम साॅरी यार त्रिशा!!!!!! मैनें जाने अनजाने मैं तुम्हें कल बहुत तकलीफ दी!!!!! और इसलिए मैं अपने व्यवहार के लिए बहुत शर्मींदा भी हूं और इसलिए मैं हाथ जोड़कर तुमसे माफी भी मांगता हूं। मुझे माफ कर दो यार।।।।"
" और जो कुछ भी हुआ था उसे भूल कर हम एक नई शुरुआत करते है। मैं वादा करता हूं इस बार मैं तुम्हारे इस जीवन को खुशियों से भर दूंगा। जो कल हुआ वो कभी भी दोबारा इस जीवन में तुम्हारे साथ नहीं होगा।" राजन ने अपनी बात खत्म की और त्रिशा के जवाब का इंतजार करने लगा।
वहीं राजन के मुंह से यह सब बात सुनकर त्रिशा पूरी तरह से कन्फ्यूज हो गई थी। वह असमंजस में थी और समझ नहीं पा रही थी कि आखिर राजन का असली रुप कौन सा है???? वो जो कल रात उसने देखा था या वो जो अभी वो अपने सामने देख रही है।
" इतना सोच क्या रही है त्रिशा.........
इसी राजन ने कल रात तुझ पर हाथ उठाया था, तेरे परिवार को भला बुरा कहा था, बिना तेरी मर्जी जाने तेरे साथ जोर जबर्दस्ती कि है।।।।। वहीं उसका असली रुप है जो तूने कल रात को देखा!!!!!!!!" त्रिशा के अंतरमन से एक आवाज आई लेकिन त्रिशा इस बात के लिए राजी होती उससे पहले ही एक ओर आवाज आई, " लेकिन त्रिशा वो नशे में था और नशे का असर खत्म होते ही उसने तेरी सिकाई कि और अपनी हालत देख तेरे कपड़े भी उसने बदले है और सबसे बड़ी बात उसने जो भी किया वो नशे में किया लेकिन माफी तो उसने होश में ही मांगी है ना।!!!!! "
"तो क्या हुआ अगर वो नशे में था?????
वो नशे में था पर तुम तो नशे में नहीं थी ना???? वो भले ही भूल जाए पर क्या तुम कल की रात को ओर कल जो कुछ भी तुम्हारे साथ हुआ या उसने किया क्या तुम उसे भुला पाओगी???? कर सकोगी माफ तुम उसे। क्या अब वो जब भी तुम्हारे सामने आएगा तो तुम्हे कल की रात याद नहीं आएगी क्या????? कल की रात के निशान को अपने शरीर से हटा दोगी पर क्या उसे अपनी आत्मा से हटा पाओगी तुम????" त्रिशा की पहली आवाज ने पलटवार किया।
"तो इंसान है वो!!!!!!! और गलती इंसान से ही होती है ना!!!!!!! उस से भी हो गई। पर उसने माफी तो मांगी ना और तूने उसकी आंखों में और आवाज में अपने लिए चिंता और फिक्र नहीं देखा क्या????? प्यार नहीं देखा क्या तूने अपने लिए उनमें???? मेरी बात मान और माफ कर दे राजन को!!!!!! और अपने नए जीवन की खुशियों से शुरुआत कर!!!!!" दूसरी आवाज ने भी पलट कर फटाफट कहा।