Quotes by Manoj kumar shukla in Bitesapp read free

Manoj kumar shukla

Manoj kumar shukla Matrubharti Verified

@manojkumarshukla2029
(79.2k)

हर मानव को खुद तपना है.....

हर मानव को खुद तपना है।
सद्कर्मों को करना है।।

पंछी सभी सिखाते हमको।
पर फैला कर उड़ना है।।

साथ निभाती प्रकृति हमेशा ।
फल-फूलों सा खिलना है।।

वृक्ष हमें छाया-फल देते।
पर-उपकारी गहना है।।

सही धर्म सिखलाता हमको।
नहीं किसी से कुढ़ना है।।

ज्ञानीजन से शिक्षा पाकर।
अमृत कलश को चखना है।।

संतों का सानिध्य मिले तो।
बैर-भाव को तजना है।।

भ्रष्टाचार बढ़ा है यारो।
नाग-कालिया नथना है।।

मनोज कुमार शुक्ल मनोज

Read More

सजल√√

नैन उनके झुके तो नमन हो गया....

नैन उनके झुके तो नमन हो गया।
भावना का सहज, निर्गमन हो गया।।

राह में कल मिले, मुस्कराते हुए।
सामने आ गए, दिल चमन हो गया।।

प्रेम की राह कंटक भरी है प्रिये।
वासना में फँसे, तो पतन हो गया।।

द्वार में बैठकर, थी प्रतीक्षा हमें।
आँख पथरा गईं सच कथन हो गया।।

चाँदनी रात मिलने का वादा प्रिये।
तुम न आए मन में चुभन हो गया।।

देश की बात पर हम सभी एक हों।
सिर निछावर किया वह रतन हो गया।।

शूर होता वही जो मिटे देश पर।
वीर बलिदानियों का वतन हो गया।।

मनोज कुमार शुक्ल मनोज
16/6/26

Read More

चोट लगती रही, मुस्कराते रहे।
जिंदगी इस तरह, हम बिताते रहे।।

घर हमारा रहा, पर अतिथिगण बहुत।
देव कहकर अतिथि मन रिझाते रहे।।

दर्द से ही बनें मित्र रिश्ते सदा।√
दूर से बस हमें सुख लुभाते रहे।।√

घर अभावों का था पर्वत सा खड़ा।
प्रभु जी फिर भी कृपा बरसाते रहे।।

एक जुट रखना था बस परिवार को।
दीप-त्यौहार मिल-जुल मनाते रहे।।

नेह के उन पलों को न भूले कभी।
याद आकर हमें वे रुलाते रहे।।

खो गया वह समय क्यों दिखता नहीं।
प्रेम की गंग में सब नहाते रहे।।

मनोजकुमार शुक्ल मनोज
12/6/26

Read More

मनुज परिस्थिति से लड़ता है.....

मनुज परिस्थिति से लड़ता है।
खुद जीवन जीना पड़ता है।।

मानवता की ज्योति जलाएँ ।
नहीं धर्म की यह जड़ता है।।

मधुरिम-मधुर सँवारो जीवन।
बुरी सोच से मन सड़ता है।।

गलत कर्म से दूरी रखिए।
लज्जित हो भू में गड़ता है।।

चिंताओं से चिता सँवरती।
वय का पौधा तब झड़ता है।।

सद्पुरुषों की धरा रही यह।
गलत मार्ग पर क्यों अड़ता है??

मनोज कुमार शुक्ल 'मनोज'
26/5/26

Read More

जीवन की बस यही अदा है......

जीवन की बस यही अदा है।
कब तक किसका साथ बदा है।।

जियो जिंदगी जी भर यारो।
मन पर भारी बोझ लदा है।।

सत्य सनातन की यह बेला।
हनुमत जी की बड़ी गदा है।।

कितना भी वह सत्य छुपा लें।
होना उसकी जीत सदा है।।

नेक राह पर चलना सीखो।
मिले सफलता यदा-कदा है।।

बंग भूमि की दुखद कहानी।
दिखी गरीबी यदा-तदा है।।

मनोजकुमार शुक्ल मनोज
22/5/26

Read More

शब्द के चित्र कवि सुंदर बनाते हैं ....

शब्द के चित्र कवि सुंदर बनाते हैं ।
जगत को सत्य का दर्पण दिखाते हैं।

भावना के सिन्धु में लगा कर गोते।
भूमिका कर्तव्य की खुद निभाते हैं।।

वेदना से भरा जग है बड़ा निर्मम।
कवि तब घावों में औषधि लगाते हैं।।

आँधियों से लड़ रहे हैं कबसे सभी।
चेतना के भाव जग को सुझाते हैं।

हटाकर निराशाओं की बदलियों को।
दिल में विश्वास का दीपक जलाते हैं।।

मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'

Read More

फिलिस्तिन इसराइल का.....(दोहे)

फिलिस्तिन इसराइल का, शुरू हुआ था युद्ध।
अमरीका-इरानी तब, कूद पड़े थे क्रुद्ध।।

हिजबुल्ला हूति हमास, आतंकी पर्याय।
धर्मोन्मादी फौज को, देख सभी थर्राय।।

परमाणू बम की कथा, जग में मचा बवाल।
अमरीका बाहें चढ़ा, ठोंके अपनी ताल।।

धर्म लबादा ओढ़कर, मानवता का ह्रास।
मुट्ठी में दुनिया लिए, करते सत्यानाश।।

इजराइल अभिमन्यु बन, फँसा हुआ यह देश।
दुश्मन की सेना खड़ी, विकट बना परिवेश।।

समय परिस्थिति ने उसे, बना दिया है शेर।
सीना ताने अब खड़ा, दुश्मन माँगे खैर।।

युद्ध गए हैं अब बदल, ना घोड़ा तलवार।
घर में ही अब बैठकर, करते शत्रु प्रहार।।

ड्रोन मिसाइल दागते, जनता भोगे क्लेश।
जीना दूभर हो गया, मानवता से द्वेष।।

हार्मोस के रूट में, बाधित हुए जहाज।
टोल टैक्स की मार से, रोता आज समाज।।

रोक तेल की धार को, ढाया सब पर जुल्म।
संकट की बेला खड़ी, कैसे टूटे इल्म।।

समवर्ती कुछ देश भी, फँसे हुए हैं जाल।
मुस्लिम खाड़ी देश का, बड़ा बुरा है हाल।।

इधर कुआँ खाई उधर, सभी रहे हैं डूब।
बनी धुरंधर फिल्म अब, चली जगत में खूब।।

झगड़े की यह पटकथा, दो देशों के बीच।
आग लगी है तेल में, प्रगति फँसी है कीच ।।

विश्व युद्ध का बिगुल सुन, बजा हुआ है आज।
दो ईश्वर सद्बुद्धि अब, रहे शांति का राज ।।

मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'

Read More

भारत की है शान, वंदेमातरम.....

भारत की है शान, वंदेमातरम।
बंकिम जी का गान वंदेमातरम।।

गोरों से लड़ी लड़ाई थी सबने।
आजादी का ज्ञान वंदेमातरम।।

गाथाएँ बलिदानों से भरी हुईं।
जनता की अब तान, वंदेमातरम।।

गांधी सुभाष आजाद भगत नारा।
स्वतन्त्रता बलिदान, वंदेमातरम।।

झुका न पाया कभी तिरंगा कोई।
रखे हथेली जान,वंदेमातरम।।

परिवर्तन आंदोलन का शस्त्र बना।
इस पर है अभिमान,वंदेमातरम।।

सैनिक कर्ज चुकाते हैं सीमा पर
कर्तव्यों का भान,वंदेमातरम।।

कदम-कदम ऊँचाई पर है बढ़ना।
लिया देश ने ठान, वंदेमातरम।।

राष्ट्रभक्ति की अलख जगाएंगे मिल।
गाएंगे सब गान, वंदेमातरम।।

मनोजकुमार शुक्ल मनोज

Read More

जग डूबा *अवसाद* में, छेड़ा जबसे युद्ध।
दोनों को समझा सकें, कहाँ से लाऊँ बुद्ध।।

विश्व प्रेम आराधना, सुख शांति *प्रासाद*।
हिल -मिलकर सब रह सकें, हटे दूर उन्माद।।

गीता के *प्रतिसाद* में, कर्म भाव ही तत्व।
जिसने जीवन को जिया, उसका बढ़ा महत्व।।

जीव जगत को है मिला, आशीर्वाद *प्रसाद*।
नेक राह पर चल पड़ो, कभी न हो उन्माद।।

मनोज कुमार शुक्ल मनोज
1/4/26

Read More

गूँजा है आकाश धरा में, फिर से वंदेमातरम....

गूँजा है आकाश धरा में, फिर से वंदेमातरम।
आजादी की जली मशालें,गाया वंदेमातरम।।

बंकिमचंद्र चटर्जी जी ने, लिखी वंदना राष्ट्र की।
गाया हम सबने मिल करके, मंत्रित वंदेमातरम।।

हमने जननी जन्म भूमि को, माँ का दर्जा दिया सदा।
मातृभूमि की बलिवेदी में, वंदित वंदेमातरम।।

उत्तर पूरब पश्चिम दक्षिण, दश दिशाओं को भाया।
भाषा की टूटी दीवारें, गूँजा वंदेमातरम।।

धर्म कहाँ तब आड़े आया, दिल को आजादी भाई।
मिल कर गाया एक स्वरों में , सबने वंदेमातरम।।

सुदृढ़ अब अर्थ व्यवस्था, देश प्रगति करता यारो।
विश्व अग्रणी बने देश यह, गाएँ वंदेमातरम।।

मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'

Read More