Quotes by Rahul Raaj in Bitesapp read free

Rahul Raaj

Rahul Raaj

@rahulraaj702863


मेरे भूतकाल और उसके भविष्य को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
भगवान उनको जीवन में बहुत खुशियां दे..
❤️❤️❤️😊😊😊😊😊🥰🥰🥰🥰

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फिर अंजान हो गए..

पहले बात हुई,

फिर दोस्ती हुई,

फिर मुझे उससे मोहब्बत हुई,

मोहब्बत फिर इतनी गहरी हुई आंखों से आंसुओं की बारिश हुई,

जीना फिर उसके बगैर मुश्किल हुआ,

मुझे उस शख्स की ऐसी आदत हुई,

फिर वो हमारे लिए जान हो गए,

वो ये जान कर हैरान हो गए,

फिर उन्हें एहसास हुआ ये सब सही नहीं,

ये सब सुन कर हम बे-जान हो गए,

बात जहां से शुरु हुई थी

फिर वही खत्म हुई..
हम दोनो एक दूसरे के लिए एक बार फिर अंजान हो गए..!!

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मैं तेरे बिना भी जी लूंगा...
ये सच है.. मगर

तेरे साथ जीता तो शायद जिंदा कहलाता...! 🫂❤️

नसीब के आगे किसी की नहीं चलती लेकिन इतना याद रखना..
बाहों में चाहे कोई भी आये महसूस वही होगा जो रूह में समाया होगा..

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सुनो लकीरों से उतर चुकी हो, अब ज़हन से भी उतर जाओ।

पहले से ही ताल्लुकात अच्छे नहीं है, निंद और आंखों के।

तुम भी आग में घी मत मिलाओ।

जाओ, जिसके हो उसे परेशान करना।

मेरे ख्वाबों में मत आओ।

सोने नहीं देता, ये तेरा सामने बैठ कर मुस्कुराना।

ढूंढने लगता हूं उठ कर इधर उधर। कम से कम इतने करीब मत आओ।

लकीरों से उतर चुकी हो, अब ज़हन से भी उतर जाओ।।

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गुज़ार दिए होंगे तुमने, कई दिन, महीने, साल.. जो काट ना सकोगे वो एक रात मैं हूँ।

की होगी गुफ्तगू, तुमने कई दफा कई लोगों से, दिल पर जो लगेगी वो एक बात मैं हूँ।

भीड़ में जब तन्हा, खुदको तुम पाओगे, अपनेपन का एहसास जो करा दे, वो एक साथ मैं हूँ।

बिताये होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ में जो भुला नहीं पाओगे, वो एक याद मैं हूँ..!!

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मैं तो अपने किरदार में ही रहना चाहता था, सीधा-सा, सादा-सा, बिना किसी बनावट के... मगर कम्बख़्त ये ज़माना हर रोज़ मुझसे एक नया मुखौटा माँगता रहा।

मैं सच बोलता तो लोग "अकड़" कह देते, चुप रहता तो "घमंड" समझ लेते, रो पड़ता तो "कमज़ोर" बना देते, और हँसता तो कहते "इसे क्या फर्क पड़ता है।"

धीरे-धीरे मैंने आईने में अपने ही चेहरे से ज़्यादा वो नक़ाब देखना शुरू कर दिया जो दुनिया को पसंद आता था।

अपने जज़्बातों को जेब में रखकर दूसरों की उम्मीदें ओढ़ ली मैंने।

मैं अच्छा इंसान बना रहना चाहता था, मगर लोग चालाकी की तारीफ़ करते हैं। मैं सच्चा रहना चाहता था, मगर यहाँ झूठ ही सबसे सुरक्षित हथियार है।

अब थक गया हूँ हर किसी को खुश करते-करते, हर रोज़ खुद से हारते-हारते... क्योंकि जो मैं हूँ वो किसी को चाहिए नहीं, और जो सबको चाहिए वो में बन नहीं पा रहा।

काश एक दिन ऐसा भी आए जब मुझे फिर से "मैं" बनने की इजाज़त मिले... बिना किसी डर के, बिना किसी मुखौटे के, बस अपने किरदार में जैसा मेरी तक़दीर ने मुझे बनाया था।

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बहुत से लोगों ने यहां अपनी कहानी अधूरी छोड़ी है..
क्योंकि वो जानते है आगे उनका किरदार सही नहीं है
और कोई भी इंसान वो कहानी किसी को नहीं सुनाता..
जिसमें वो खुद गुनाहगार हो...

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धीरे-धीरे जीवन हमें ये सिखाता है कि लोग आएंगे और चले जाएंगे,
कभी बिना वजह, कभी बिना अलविदा कहे शुरुआत में हर बिछडना दिल तोडता है,
पर समय के साथ समझ आता है कि हर किसी का आना किसी मकसद से होता है
कुछ प्यार सिखाने, कुछ सब्र, और कुछ बस हमें मजबूत बनाने।

हर रिश्ता हमेशा के लिए नहीं होता, कुछ बस एक चैप्टर की तरह आते हैं
और पूरा होते ही चले जाते हैं।
और तब हमें समझ आता है कि हम गलत नहीं थे,
बस कहानी वहीं तक थी।
जब ये बात दिल से स्वीकार कर लेते हैं,
तब एक अजीब सी शांति मिलती है !

कि जो हमारे पास है, वही सही है..!

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वो अब वो नहीं रहा

सालों बाद जब मैंने देखा उसे मुझे लगा कि अब वो वो नहीं रहा।

वो जज़्बात बदल चुके थे उसके भी... और मेरे भी।

पर मुझे अभी भी प्रेम था उससे, जो वो कभी था।

क्योंकि वो अब नहीं है, फिर भी मेरी स्मृतियों में है, मेरी बातों में है।

वो नहीं है उसमें भी...

पर वो मुझमें है -

बिल्कुल वैसा ही जैसा उस वक़्त था जब हम साथ थे।


क्योंकि मैं तो उसे प्रेम करता हूँ, और उससे वो प्रेम हमेशा रहेगा,
भले ही अब वो जज़्बात नहीं रहा,
भले वो अब वो नहीं रहा।

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