जब जब मन,
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प्रेम से भर जावे,
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भाए कुछ न और।
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प्रीतम से मनभावन,
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कुछ ना लागे......,
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प्रीतम से बढ के.....,
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न कोई ओर.......,
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बस, प्रीतम ही प्रीतम,
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मनमंदीर मे समाई।
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Nilam Monik Vithlani