"इक अजीब - सी रोशनी थी उस बूढ़े इंसान की आंखों में,जो सर पे अनुभवों की पगड़ी बांधे, चींगुरे हुए शरीर पर झूूर्रियों से भरा कुर्ता - पैजामा पहने हुए,अपने बांस की गोल - सीधी लाठी से उस सुनसान कली रात को चीरता हुआ, गांव की बिहड़ पगडंडियों पर निडर आगे बढ़ा जा रहा था।"
..रॉयल..