Free Hindi Thought Quotes by Khushboo Bhardwaj RANU | 111760838

रुकना चाहूँ तो भी रुक नहीं सकती,,,,
थकना भी चाहूँ तो थक नहीं सकती,,,,
अपने लिए होता तो तोड़ देती ये जिन्दगी की डोर,,,,
पर बेबस हूं, क्यूँकी मेरी सांसो के बिना मेरे अपनों की धड़कने भी चल नहीं सकती!!!

-Khushboo Bhardwaj RANU

Khushboo Bhardwaj RANU 7 months ago

हाँ,,, आपनो के लिये जीने में कुछ अलग ही सुकून मिलता है

A.P 7 months ago

Sahi kaha apne liye nahi apno ke liye jina jaruri hai ji...

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