📘 पुस्तक समीक्षा: सवाल ही जवाब है
पुस्तक का नाम: सवाल ही जवाब है
विधा: विचारात्मक / दर्शन / आत्मचिंतन
भाषा: हिंदी
✨ समीक्षा:
“सवाल ही जवाब है” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि सोचने की एक नई दिशा है। यह किताब पाठक को सीधे जवाब नहीं देती, बल्कि ऐसे सवाल सामने रखती है जो पाठक को खुद के भीतर झाँकने पर मजबूर कर देते हैं। लेखक का मानना है कि जीवन के बड़े उत्तर बाहर नहीं, हमारे भीतर छिपे होते हैं—बस सही सवाल पूछने की ज़रूरत होती है।
किताब की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरल भाषा और गहरी बात है। हर अध्याय एक नए प्रश्न से शुरू होता है, जो धीरे-धीरे जीवन, समाज, रिश्तों, संघर्ष और आत्मा से जुड़ी परतें खोलता है। लेखक कहीं उपदेश नहीं देता, बल्कि पाठक को खुद सोचने की आज़ादी देता है।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए बेहद खास है—
जो जीवन में उलझन महसूस करते हैं
जो खुद को बेहतर समझना चाहते हैं
जो जवाबों से ज़्यादा सही सवालों की तलाश में हैं
📌 विशेष बिंदु:
✔️ छोटी-छोटी पंक्तियों में बड़ा अर्थ
✔️ आत्मचिंतन को प्रेरित करने वाली शैली
✔️ हर उम्र के पाठक के लिए उपयोगी
✔️ बार-बार पढ़ने योग्य पुस्तक
⭐ निष्कर्ष:
“सवाल ही जवाब है” हमें यह सिखाती है कि जीवन में हर समस्या का हल तुरंत जवाब में नहीं, बल्कि सही सवाल पूछने में छिपा होता है। यह किताब सोचने वालों की किताब है, महसूस करने वालों की किताब है।