मेरी समझ में यह नहीं आता..किसी समय में प्यार मेरे लिए पूजा हुआ करता था.. मैं जमाने से लड़ने को तैयार था इसके लिए..इसके सामने मैं कुछ भी नहीं समझता था किसी को..अब समय बदला बच्चे बड़े हो गए तो यह पूजा में अपने बच्चों को क्यों नहीं करने देता? क्यों मुझे इस प्यार के नाम से नफरत हो गई है..मेरे लिए किसी समय में जो पूजा हुआ करता था यह प्यार अब कैसे मेरे दिल में इसे पूजा नहीं मानता.. अपने बच्चों को मैं पूजा नहीं करने देना चाहता..
ऐसा क्यों? क्या किसी के पास इसका जवाब है?