इतिहास उठाकर देख लो—
जितने भी महान लेखक, ज्ञानी, साधु-संत, ऋषि-मुनि,
वीर योद्धा और राजा-महाराजा हुए हैं,
सबने अपने जीवन में संघर्ष सहा है।
उन्होंने समाज के लिए काम किया,
आजादी के लिए लड़े,
शिक्षा और ज्ञान के लिए अपना जीवन लगा दिया।
लेकिन जब वे यह सब कर रहे थे,
तब समाज ने उनका साथ कम दिया…
उन पर आरोप लगाए,
उनका मज़ाक उड़ाया,
यहाँ तक कि कई बार पत्थर भी मारे।
पर उन्होंने लोगों की बातों की चिंता नहीं की,
वे अपने रास्ते पर चलते रहे।
समय बीता…
और वही लोग बाद में महान कहलाए,
उनका नाम इतिहास में अमर हो गया।
सच यही है—
समाज अक्सर किसी को आगे बढ़ते देख
पहले उसे गिराने की कोशिश करता है।
आप चाहे कितने भी सकारात्मक क्यों न हों,
कुछ लोग आपको गलत ही समझेंगे।
संघर्ष में साथ देने के बजाय
वे आलोचना और पत्थर ही बरसाएंगे।
लेकिन यही दुनिया का नियम है—
जो पत्थरों से डर गया,
वह रास्ता नहीं बना पाया।
और जिसने पत्थरों को सह लिया,
वही इतिहास बना गया।