हर वक़्त, हर बार, हर बात में "मैं सही हूं" साबित करने की हमारी आदत, या कोशिश,
कभी-कभी हमको "मैं सही था" वाले हालत तक ले जाने का कारण बन सकती है. और तब हमें जो नुकसान, या फिर दर्द महसूस होता है, वह दुःख, या नुकशान, जीवन में दो चार बार, दो चार जगह, या फिर दो चार लोगों के सामने सही होने के बावजूद खुद को गलत साबित होना पड़े, इससे तो बड़ा ही होता है.
- Shailesh Joshi