बस में होता अगर मेरी
कविता
बस में होता अगर मेरे
तो उतार लाता जमीन पर चांद को
और रोशन तुम्हारे अंधेरी रातों को करता
बस में होता अगर मेरे
तो तेरे होठों की हंसी जो कभी भी फीकी पड़ती
उसके लिए मैं सागर की आखिरी छोर से लाली लाता
और लाली से तेरी होठों की मुस्कान भर देता
बस में होता अगर मेरे
तो तेरी आंखों में यूं कभी आंसू ना आने देता
समुद्र के बीच से वह लहेर उठा लाता
जो लहेर तेरी आंखों को ठंडक देती
बस में होता अगर मेरे
तो कभी तुम्हें विचलित न होने देता
धरती से दूर स्वर्ग से वे फूलों वाली बादीयां लता
जो तुम्हें शगुन देता
बस में होता अगर मेरे
तुम्हें अकेला कभी महसूस न होने देता
तीनों लोको की हर एक प्राणी को
तुम्हारे महरून बनाता
जो तुम्हारी कहानी सुनता
बस में होता। अगर मेरे
आगर ऐ कविता अच्छे लगे तो
आगे तक करें
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯