💔 अरबपति CEO की कॉन्ट्रैक्ट पत्नी
📖 एपिसोड 2: “सिंह हवेली में पहली रात”
शाम का समय था।
मुंबई की भीड़ से दूर, शहर के सबसे पॉश इलाके में एक विशाल हवेली खड़ी थी—सिंह हवेली।
ऊँचे गेट, काले पत्थरों की दीवारें और अंदर फैली हुई ऐसी शांति जो डर पैदा करती थी।
एक काली कार धीरे-धीरे अंदर दाखिल हुई।
कार का दरवाज़ा खुला… और अनन्या बाहर निकली।
उसने पहली बार उस जगह को देखा और कुछ पल के लिए ठहर गई।
यह कोई घर नहीं था… यह एक साम्राज्य था।
पीछे से ड्राइवर बोला,
“मैडम, अंदर चलिए।”
अनन्या ने हल्का सा सिर हिलाया और अंदर बढ़ गई।
जैसे ही वह मुख्य दरवाज़े पर पहुँची, भारी लकड़ी का दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
अंदर खड़े थे हाउस स्टाफ—लाइन में, बिल्कुल अनुशासन में।
एक महिला आगे आई।
“मैं रमा, इस घर की मैनेजर।”
उसकी नजरें अनन्या को ऊपर से नीचे तक देख रही थीं, जैसे कोई नई चीज़ का मूल्यांकन कर रही हो।
“सर ने आपको ऊपर का कमरा दिया है। नियम बाद में बताए जाएंगे।”
अनन्या ने धीमे से पूछा,
“आर्यन… कहाँ हैं?”
रमा का चेहरा थोड़ा सख्त हो गया।
“सर बिज़ी हैं। वह आपको रात के खाने पर भी नहीं मिलेंगे।”
यह सुनकर अनन्या को हल्का सा झटका लगा, लेकिन उसने कुछ कहा नहीं।
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ऊपर कमरे में ले जाया गया।
कमरा बहुत बड़ा था—सफेद पर्दे, महंगा फर्नीचर, और एक बड़ी खिड़की जिससे पूरा शहर दिख रहा था।
लेकिन उस खूबसूरती में भी एक खालीपन था।
अनन्या ने अपना छोटा सा बैग रखा और खिड़की के पास खड़ी हो गई।
नीचे शहर चमक रहा था… लेकिन उसका दिल भारी था।
“एक कॉन्ट्रैक्ट शादी… क्या सच में जिंदगी बदल सकती है?” उसने खुद से पूछा।
तभी कमरे का दरवाज़ा अचानक खुला।
आर्यन सिंह अंदर आया।
सूट बिल्कुल परफेक्ट, चेहरा शांत लेकिन आँखों में वही ठंडक।
अनन्या चौंक गई।
“आप…?”
आर्यन ने उसे बीच में ही रोक दिया,
“यह मेरा घर है। मैं जब चाहूँ आ सकता हूँ।”
उसकी नजरें कमरे में घूमीं और फिर अनन्या पर आकर रुकीं।
“तुम्हें किसी चीज़ की कमी नहीं होगी। लेकिन एक बात याद रखना—यहाँ तुम सिर्फ़ एक नाम हो।”
अनन्या ने शांत आवाज़ में कहा,
“नाम भी लोग बनाते हैं, श्री सिंह। खोते नहीं।”
आर्यन की आँखें थोड़ी सिकुड़ीं।
यह जवाब उसे पसंद नहीं आया था।
वह आगे बढ़ा और मेज पर एक फाइल रख दी।
“यह घर के नियम हैं। पढ़ लो।”
अनन्या ने फाइल नहीं उठाई।
“मुझे नियमों से ज्यादा इंसानों की समझ है।”
एक पल के लिए दोनों के बीच अजीब-सा सन्नाटा फैल गया।
आर्यन ने पहली बार थोड़ा झुंझलाकर कहा,
“तुम समझती नहीं हो तुम किस दुनिया में आ गई हो।”
अनन्या ने उसकी आँखों में देखा,
“और आप समझते नहीं हैं कि मैं किस मजबूरी से आई हूँ।”
कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे।
फिर आर्यन मुड़ा और दरवाज़े की तरफ बढ़ गया।
जाते-जाते उसने बिना पीछे देखे कहा,
“कल से मीडिया इंटरव्यू शुरू होंगे। तुम तैयार रहना।”
और वह चला गया।
दरवाज़ा बंद हो गया।
कमरा फिर से खाली हो गया…
लेकिन इस बार अनन्या अकेली नहीं थी।
उसके अंदर एक अजीब सा एहसास था—
यह घर सिर्फ़ एक कॉन्ट्रैक्ट की जगह नहीं था…
यह एक जंग का मैदान था।
और कहीं न कहीं… आर्यन भी उतना ही अकेला था जितनी वह।