बारिश कब तुम आओगी ?
बारिश कब तुम आओगी
कितना हमें तड़पाओगी
सूरज कितना दहक रहा है
पत्ता-पत्ता सुलस रहा है
ठंडी फुहारें कब बरसाओगी
बारिश कब तुम आओगी
अम्बर प्यासा, प्यासी धरती
कब इनकी प्यास बुझाओगी
बारिश कब तुम आओगी
सूख गये सब ताल-तलैया
कर दो अपने आँचल की छाया
देख राह नैना तरस गये
सावन में भीगे बरस गये
छम छम करती कब आओगी
बारिश कब तुम आओगी
प्रकृति का श्रृंगार कर दो
हम पर ये उपकार कर दो
पानी की बौछार कर दो
नदियों में संगीत भर दो
भीगे तन और भीगे मन
ऐसी बहारें कब लाओगी
बारिश कब तुम आओगी !
---dr वंदना शर्मा नई दिल्ली