उठ खड़ा हो अब, ऐ मुसाफिर, रास्ते तुझे पुकार रहे हैं,
मंजिल के ख्वाब तेरी आंखों में, तेरी राहों को संवार रहे हैं।
ये थका हुआ बदन, ये मुश्किल घाटियां, बस इम्तिहान हैं तेरा,
तू हार मत मान, तेरे हौसलों से ही रोशन ये जहान है तेरा।
अंधेरों से मत डर, क्योंकि हर रात के बाद ही सुबह आती है,
तू गिर के संभलना सीख ले, यही जिंदगी जीने की कला सिखाती है।
शिखर तक पहुंचने की जिद, तेरे अंदर एक आग होनी चाहिए,
बस हिम्मत मत हार, तेरी मेहनत में ही तेरी पहचान होनी चाहिए।
ये वक्त तेरा है, इसे यूं ही न गंवा, अपने लक्ष्य पे ध्यान दे,
मुसीबतों का सामना कर, खुद को एक नया मुकाम दे।
लोग कहेंगे तुझसे कि तू ये नहीं कर सकता, उन्हें गलत साबित कर,
अपनी चोटियों को छूने के लिए, तू बस अपना इरादा काबिल कर।
कुछ भी नामुमकिन नहीं, अगर तू ठान ले दिल में अपने,
सच होंगे एक दिन, जो आज सजाए हैं तू ने अपने सपने।
मुस्कुरा कर कदम बढ़ा, तू जीत का ही एक नाम है,
जिंदगी की इस लड़ाई में, बस तेरी जीत ही तेरा इनाम है।
~Shubhra Dubey