1. जो टूट कर चाहे, उसे दर्द ही मिलता है,
कोई क्या समझेगा, ये कैसा सिला है।
प्यार उसी के नाम का बना है,
पर प्यार ही उसकी किस्मत में नहीं लिखा है।
2. कोई चाहता भी है उसे पागलों की तरह, और फिर उसी के लिए उसे छोड़ भी जाता है।
पता तो है उसे, उसे क्या चाहिए,
पर किस्मत को ये मंज़ूर कहाँ होता है।
3. वो हर ज़ख्म पर मुस्कुरा देता है, लोग समझते हैं उसे दर्द नहीं होता।
अरे वो हँसता है इसलिए,
क्योंकि अब उसे रोना नहीं आता।
4. नसीब में प्यार था ही नहीं उसके, बस दर्द का एक समंदर था।
जिसे दिल से चाहा उसने,
वो ही उसके लिए ज़हर था।
5. इतना टूट चुका है वो अब, कि टूटने का एहसास नहीं होता।
दर्द सहने की आदत सी हो गई है,
अब किसी बात से दिल उदास नहीं होता।
- Mawaskar Pratigya