बो बहाने ढूंढ़ रहा था। मुझसे दूर जाने के....
तो मेने भी उसे बजह देदी,
मुझे भूल जाने की...
जानते हो क्यों? क्यूंकि?
बो कोई पंक्षी नहीं था।
जिसे मैं पिंजरे मैं कैद करती।
और मेने कोई पिजरा भी नहीं रखा,
उसे कैद करने के लिए....
फिर भी…
मैं उसका आशमा बन गई।
उसके पंखो को लम्बी उड़ान देने ले लिए।
- khwahishh🕊️