रिश्तों की रोशनी
रिश्ते धागे जैसे होते हैं,
नाज़ुक भी, अनमोल भी,
थोड़ा-सा प्रेम मिले तो जुड़ जाते हैं,
थोड़ा-सा अहंकार हो तो टूट जाते हैं।
हर रिश्ता साथ रहे,
यह जरूरी तो नहीं,
कुछ लोग दूर होकर भी
दिल के पास रहते हैं कहीं।
जिसने बुरे वक्त में हाथ थामा,
उसे अच्छे वक्त में मत भूलना,
जिसने तुम्हारी खामोशी समझी,
उसके सामने शब्दों का हिसाब मत खोलना।
रिश्तों में जीत नहीं होती,
वहाँ समझदारी होती है,
जहाँ “मैं” थोड़ा कम हो जाए,
वहीं “हम” की शुरुआत होती है।
और अगर कभी कोई रिश्ता
तुम्हें भीतर से तोड़ने लगे,
तो उसे बचाने से पहले
अपने मन को बचा लेना।
क्योंकि सच्चा रिश्ता वही है—
जहाँ सम्मान बना रहे,
विश्वास जीवित रहे,
और दूरियाँ चाहे जितनी हों,
दिल में अपनापन बना रहे।
रिश्ते निभाइए प्रेम से,
मगर स्वयं को खोकर नहीं;
क्योंकि सबसे सुंदर रिश्ता वही है,
जिसमें प्रेम भी हो और आत्म-सम्मान भी। 🌸