एक ही पता, एक मीठा इत्तिफ़ाक़
एक ही पता था, रास्ते भी वही,
एक लड़का था, एक लड़की थी कहीं।
मुलाक़ातें कम थीं, मगर यादें हज़ार,
छोटी-सी वो दुनिया, लगती थी ख़ास।
इत्तिफ़ाक़ था या किस्मत की बात,
एक ही पते ने जोड़ दिए जज़्बात।
वक़्त गुज़र गया, रास्ते बदल गए,
पर वो मीठी यादें आज भी साथ रह गए। ❤️
- SARWAT FATMI