प्यार करते-करते
डूबने लगा था,
पगडण्डियां जिधर थीं
उधर हैं,
उजाला जिधर था
उधर है।
प्यार करते-करते
ठिठक गया था,
राधा-कृष्ण के प्यार सा
बिखर गया था।
चला बहुत था
दुनिया के महाभारत में
खड़ा था,
जो मौन थे
वे भी मर रहे थे।
प्यार के बाद
दुख बहुत थे।
*** महेश रौतेला