सोशल मीडिया पर मेरे ख्याल मे पहचान के साथ परिपक्वता आती है।
शुरुआत में हम अनाम होते हैं..मन में जो आया, लिख दिया.. किसने पढ़ा, किसने समझा,कौन disagree है कोई फर्क नहीं पड़ता।
फिर लोग जानने लगते है..और आपकी लिखी हुई बातों से आप जज होने लगते हो..आपकी छवि बनाने लगते है.. और फिर..