(01) वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने EVM के साथ VVPAT का इस्तेमाल किया। VVPAT में मतदाता के हाथ में एक काग़ज़ी पर्ची दी जाती है और मतदाता को वह पर्ची बॉक्स में डालनी होती है।
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(02) लेकिन पूरे वेनेज़ुएला में एक भी VVPAT की गिनती नहीं की गई। EVM ने परिणामों को एक सुरक्षित नेटवर्क के ज़रिए सीधे केंद्रीय कक्ष (सेंट्रल रूम) में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेज दिया।
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(03) केंद्रीय कक्ष ने यह घोषित कर दिया कि मादुरो को 52% वोट मिले हैं !!!
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(04) जो लोग EVM के ख़िलाफ़ थे, उन सभी को “USA के एजेंट” कहकर बदनाम किया गया और फिर पुलिस द्वारा पीटा गया !!
क्या यह कुछ जाना-पहचाना नहीं लगता?
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(05) वेनेज़ुएला के कार्यकर्ताओं को मेरा प्रस्तावित समाधान यह है —
वैकल्पिक OPEN VOTE (खुले मतदान) के लिए जनमत-संग्रह (Referendum) कराया जाए और यह तथ्य व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए कि
1792 से 1882 के बीच, पूरे अमेरिका में राष्ट्रपति, लोकसभा (Congress), विधानसभा, गवर्नर, जज और शेरिफ — सभी का चुनाव केवल खुले मतदान (Open Vote) से ही होता था।
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(06) और केवल पेपर बैलेट का उपयोग किया जाए, साथ में स्पष्ट और कड़े Ballot Access Laws हों।
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(07) मादुरो ने, ठीक मार्क्स और लेनिन की तरह, तेल के मुनाफ़े को सीधे नागरिकों के खातों में बाँटने का विरोध किया।
तेल से होने वाला पूरा मुनाफ़ा उन सरकारी योजनाओं में लगाया गया जिन्हें वह स्वयं पसंद करता था।
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(08) भारत (भारत/भारतवर्ष) में भी मार्क्सवादी और दक्षिणपंथी (Rightist) बुद्धिजीवी, दोनों ही खनिज और तेल के मुनाफ़े को सीधे जनता में बाँटने का विरोध करते हैं।
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(09) मेरा प्रस्तावित समाधान यह है —
भारत और वेनेज़ुएला दोनों में खनिज और पेट्रोलियम मंत्रियों के लिए OPEN VOTE आधारित चुनावी Recall (रिकॉल) व्यवस्था लागू की जाए।
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(10) इससे यह सुनिश्चित होगा कि कच्चे तेल और खनिज संसाधनों से होने वाला मुनाफ़ा सीधे जनता में वितरित किया जाए।
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