तुम मुझसे रूठी हो,
पर मेरी खामोशी में भी तुम्हारा नाम है।
हर पल तुम्हारी हँसी की आवाज़ मेरी सांसों में गूंजती है,
और हर खामोश लम्हा तुम्हारी याद से भर जाता है।
मैं जानता हूँ, मेरी बातों में कभी-कभी तूफ़ान आ जाते हैं,
पर मेरे दिल के कोने में सिर्फ़ तुम्हारी जगह है।
तुम्हारे बिना हर रंग फीका लगता है,
और हर गीत अधूरा सा लगता है।
अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बिना दुनिया बेरंग है,
तो क्या तुम मुझे माफ़ कर दोगी?
अगर मैं हाथ बढ़ाऊँ और कहूँ,
“चलो फिर से हँसें, साथ में,”
क्या तुम उस पल को फिर से मेरे साथ जीओगी?
मैं वादा करता हूँ,
ना कोई बड़ी बात होगी, ना कोई झगड़ा याद रहेगा।
सिर्फ़ तुम और मैं,
और वो नन्ही-सी मुस्कान जो तुम्हारे होंठों पर लौट आए।
तो क्या तुम मेरी दुनिया में फिर से लौटोगी,
और मेरे हर एक दिन को रोशनी से भर दोगी?