हर सांस में खुश्बू
हर आती जाती सांसों में, तेरी खुश्बू ही आती है।
वो बार बार तड़पाती है यादों की धूंध मिटाती है।
अनगिन कांटे हैं चुभी हुईं, अनगिन घावें हैं हरी अभी।
फिर भी तेरे स्पर्शों से, हर दर्द खुशी बन जाती है।
जिस रस्ते पर हैं चले साथ,जिन वादों की कस्में लिये हाथ।
बिखरे टूटे उन कस्मों से,तेरे आने की आहट आती है।
सूखी सूखी तेरे ओठों पे,कब खुशी की लाली आएगी।
कब दौड़ कर तू आ जाएगी,हर क्षण आभास कराती है।
*मुक्तेश्वर मुकेश
कविता दिवस,21 मार्च 2026
- Mukteshwar Prasad Singh