खेल खेले बचपन में, एक आंगन में
रोए बचपन में, एक आंगन में
सम्मानित हुए बचपन में, एक आंगन में
अपमानित भी हुए, उसी आंगन में
आज वही आंगन तुम्हें पुकारता है
आने को, लौट जाने को
वहीं हँसी, वही यादें, वही छोटी खुशियाँ
एक बार फिर जीने को उसी आंगन में।
- Kiran