गूँजा है आकाश धरा में, फिर से वंदेमातरम....
गूँजा है आकाश धरा में, फिर से वंदेमातरम।
आजादी की जली मशालें,गाया वंदेमातरम।।
बंकिमचंद्र चटर्जी जी ने, लिखी वंदना राष्ट्र की।
गाया हम सबने मिल करके, मंत्रित वंदेमातरम।।
हमने जननी जन्म भूमि को, माँ का दर्जा दिया सदा।
मातृभूमि की बलिवेदी में, वंदित वंदेमातरम।।
उत्तर पूरब पश्चिम दक्षिण, दश दिशाओं को भाया।
भाषा की टूटी दीवारें, गूँजा वंदेमातरम।।
धर्म कहाँ तब आड़े आया, दिल को आजादी भाई।
मिल कर गाया एक स्वरों में , सबने वंदेमातरम।।
सुदृढ़ अब अर्थ व्यवस्था, देश प्रगति करता यारो।
विश्व अग्रणी बने देश यह, गाएँ वंदेमातरम।।
मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'