तुम पर ही मरना मेरी किस्मत बन गई है
कविता
तुम्हें देख कर आहें भरना
और तुम पर ही मरना
मेरी किस्मत बन गई है
और ऐ किस्मत
मेरी नींद से भरी आंखें है
जो कभी खोलती नहीं
बस बंद रहना चाहता है
इसलिए कि वह तुम्हें चोबिसो घंटे
अपने सामने देख सके
आंखें खोलने पर ख्वाब टूट जाते हैं
और ख्वाब का टूटना
हमें गवारा नहीं
क्योंकि ख्वाब में ही तुम आते हो
ख्वाब में ही तुम अपने बन जाते हो
और ख्वाब के बिना
तुम मेरी दुनिया में कहीं भी नहीं
भला मैं कैसे ना चाहूं
हमेशा आंखें बंद करके रखना
क्या तुम्हें मेरी दर्द का पता है
शायद नहीं
क्योंकि तुम एक ख्वाब हो
और ख्वाब से उम्मीद रखना
की असल में
वह हमारे दर्द को समझे यह बेकार है
फिर भी ऐ बेकार पना में
मैं जिंदा हूं
सांस ले रहा हूं
और तुम्हें चाहा रहा हूं
इस उम्मीद में कि
शायद तुम कभी हकीकत बन के सामने आ जाओ गे
पर सच तो यह है
उम्मीद नहीं फिर भी इंतजार कर रही हूं
एक उम्मीद लिए की कोई है
जिससे मैं प्यार कर रही हूं
भला वो एक ख्वाब ही क्यों ना हो
हकीकत में ना ही क्यों ना हो
किसी को हर वक्त चाहते रहना
खुशी देती है
पर ना मिलने वाले इंसान को
हर वक्त चाहते रहना
दर्दनाक है
और मौत से भी बत्तर जिंदगी
और यह बत्तर जिंदगी ही मेरी किस्मत बन गई है
तुम्हें सोचना तुम्हें चाहते रहना
चोविसो घंटे दर्द भी देती है
और खुशी भी
और मैं क्या कर सकती हूं
नहीं पता
तुम्हें सोचते हुए
अंदर कुछ फील हो रहा है
सीने के अंदर अजीब सी बेचैनी उठ रही है
एक ऐसी बेचैनी जो
मुझे जीने भी नहीं देती
और मरने भी नहीं
और जीने मरने के बीच वाली
जिंदगी मेरी किस्मत बन गई है
और बेचैन सांसों लेना मेरी जरूरत बन गई है
अगर यह कविता आप सबको पसंद आए तो
आगे पढ़ते रहेंगे
मैं आपके प्रिय लेखक अभी निशा❤️🦋💯