कान्हा…
अब थक गई हूँ हर बार खुद को समेटते-समेटते… 💔
तुम दूर जाते हो
और मैं फिर भी तुम्हारे लौट आने की दुआ करती हूँ…
शायद यही राधा का प्रेम है—
टूटकर भी सिर्फ कृष्ण को चाहना। 🌙
“अब दर्द भी तुम्हारा लगता है कान्हा,
और सुकून भी तुम ही हो…
कैसे छोड़ दूँ उस मोहब्बत को,
जिसमें मेरी पूरी रूह बसती हो…” 💙