5.. महाराणा हम्मीर सिंह
चित्तौड़ का पुनः अधिग्रहण व हिंदू साम्राज्य की स्थापना
(1326-1364 ईसवी)
जब अलाउद्दीन खिलजी ने छल से चित्तौड़गढ़ को लहूलुहान कर दिया और रावल शाखा का अंत हो गया, तब राख के ढेर से एक ऐसा अंगारा उपजा जिसने समूचे राजपूताना का भाग्य बदल दिया। वह योद्धा जिसने न केवल दिल्ली सल्तनत के घमंड को चूर-चूर कर चित्तौड़ पर फिर से केसरिया लहराया, बल्कि दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक को युद्ध में हराकर 3 महीने तक बंदी बनाकर रखा। जानिए ‘मेवाड़ के उद्धारक’ महाराणा हम्मीर सिंह सिसोदिया की वह अनसुनी महागाथा, जो आज भी हमारी रगों में देशभक्ति का खून दौड़ा देती है...
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