कविता
तू रहता कौन से शहर में है
क्या तेरे पास जाने की कोई और रास्ता है
है तो बताना
मुझे सचमुच में तेरे पास जाना है
तू रहता कौन से शहर में
और तुम्हारा घर का पता क्या है
मुझे नहीं मालूम बताना
मुझे तुझे ढूंढते हुए तुम्हारे शहर तक जाना है
तुम्हें गले लगाने के लिए तुम्हारे घर तक आना है
तू है इस दुनिया की या तेरा दुनिया कही और है
सच-सच बताना तू किस दुनिया से है
मुझे सचमुच में तुमसे मिलना है
तेरी एहसासों में जीती रही आज तक मैं
तुम्हें सपनों में देखती रही आज तक में
पर अब ऊब गई हूं मैं
इस नियंत्रर एक जैसे चलते हुए जिंदगी से
अब मुझे तुम्हारे पास आकर
तुम्हें महसूस करना है
क्या-क्या बताऊं तुम्हें
तुम्हें गले लगाना है तुम्हें चूमना है
तुम्हारे साथ पूरी दुनिया घूमना है
मेरी ख्वाहिश तुझसे शुरू होती है
और तुम्हें तक जाती है
पर मैं निराश हूं
इन ख्वाहिशों से
जो हकीकत होते हुए मुझे कभी ना देखा
तू है कहीं पर इन आंखों के सामने तू कभी ना दिखा
क्या यही मुकद्दर है हमारी
या बस यह मेरी किस्मत है
तुम्हें सोचते रहना
और सोचते रहना पागलों की तरह
सोचते रहना
और सोच सोच कर तुम्हें पाने की झूठी ख्वाब बुनना
उफ
कितनी पागलपन से भरी हुई मेरी ऐ दिमाग है
जिससे तुम कभी जाते ही नहीं
पर क्या करूं अगर तुम्हें भुलाना आसान होता तो
भुला दिया होता
और दिल मै किसी और से कब की लगा लिया होता
सच कहूं तो तुम्हें भुलाने सच में बहुत ही मुश्किल है
मेरे लिए
पर अब सोचती हूं तुम्हें ढूंढती रहूं
या तुम्हें ढूंढना छोड़ कर
थोड़ी ध्यान खुद पर दे दु
ऊफ तुम्हारा नाम लेकर
मेरे लिए यह डिसाइड करना भी मुश्किल है
क्या करूं तुम्हारा नाम लेना छोड़ दूं
पर तुम्हारा नाम से ही तो यह धड़कन धड़कती है
यह थम जाएगी तो मैं मर ही जाऊंगा
आ कितना मुश्किल है
मेरे लिए ऐ जहां मे
तुम्हें ढूंढना और खुद को संभालना