मानसिक स्वास्थ्य का अंक २
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सिर्फ विचार या सिर्फ भावनाओं को अलग कर के नहीं देखा जा सकता। विचार और भावना दोनों मिल कर "मूड" बनाते है, और आप का "मूड" ही आप के कार्य की गुणवत्ता को बनाता और बिगाड़ता है। इस "मूड" का कारक चंद्रमा है और उसका अंक २ है। विज्ञान यह साबित कर चुका है कि मूड में आने वाले परिवर्तन का कारण रसायन है। और उस रसायन का कारक भी चंद्रमा है। रासायन ( केमिकल्स)से जुड़ी हुई प्रक्रियाओं में परिवर्तन विविध प्रकार के भरम या अवसाद को जन्म देती है, जिससे एंजाइटी, डिप्रेशन,स्किज़ोफ्रेनिया जैसी तकलीफें होती है।
चंद्रमा संवेदनशीलता और भावुकता से जन्मी आत्मीयता और पीड़ा का कारक भी है, कई बार कलात्मकता और सौदर्य से इस संवेदनशीलता को रचनात्मक आयाम मिलता है, कभी कभी यह संवेदनशीलता गुढ़ अंतर्प्रेरणा में बदल कर करुणा से दूसरों की सहायता करती है। यह संवेदनशीलता और भावुकता जितनी स्वस्थ और प्रसन्न है उतनी ही आप की मनोदशा भी स्वस्थ और प्रसन्न रहेगी और आपके विचार और शारीरिक ऊर्जा भी स्पष्ट और स्वस्थ होंगे। शरीर और भावुकता का भी संबंध है। आप शरीर को फुर्तीला रखेंगे और प्राणायाम का नित्य अभ्यास करेंगे तो शांति और संतुलन बना रहेगा।
(१) अनुलोम विलोम प्राणायाम के ११ आवर्तन के बाद
(२) शितली और भ्रामरी प्रणायाम को साथ जोड़ कर २० मिनिट का ध्यान आप को शांति और सुकून देगें।
जिनको भी अंक कुंडली में
२-८
२-४
२२२/ २२२२
८८८/४४४
के योग है उनको यह अभ्यास फायदा देगा।