मैं और मेरे अह्सास
जीवन
जीवन हौसलों के साथ जीना चाहिए l
सुख दुःख को हँसकर पीना चाहिए ll
जिंदगी के थपेड़ों को दूर करने के लिए l
अपने अपनों के गम को सीना चाहिए ll
उल्फ़त और चाहत के रंग में रंगकर l
रुदय का एक कोना तो भीना चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह